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hindi science fiction story- डॉ रमेश और हरे ग्रह की सैर

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हम हर दिन एक से बढ़कर एक वैज्ञानिक कहानिया प्रकाशित करते हैं। इसी कड़ी में आज डॉ रमेश और हरे ग्रह की सैर hindi science fiction story प्रकाशित कर रहे हैं।आशा है ये आपको अच्छी लगेगी।

hindi science fiction story

डॉ रमेश एक कामयाब वैज्ञानिक थे.उनकी हर रात तारो के नाम होती थी,एक दूरबीन और एक कॉफ़ी का जग यही दुनिया होती थी.तारो के रहस्य खोजते एक दिन नासा की एक रिसर्च पढ़ रहे थे,रिसर्च में किसी हरे ग्रह के बारे में बताया गया था जहा तापमान -50 डिग्री औरवातावरण काफी शुष्क था धरती से उसकी दुरी कई प्रकाश वर्ष दूर थी डॉ रमेश ने सोचा –“क्या वाकई हमारी धरती से बाहर कोई दुनिया हैं क्या वाकई कोई प्रजाति हैं जो हमसे तकनीक में आगे हो या ये सिर्फ भ्रम हैं . कहते हैं जहा से जिज्ञासा जन्म लेती हैं वही से एक खोज नए आविष्कार को जन्म देती हैं। डॉ रमेश एक ऐसी मशीन बनाने का सोचते हैं जो किसी प्रजाति से संपर्क साध सके। वो अपने काम में लग जाते हैं किसी दीवाने की तरह जो शायद किसी मंजिल से मिलन करने को बेक़रार हो। मशीन बनने में 2 महीने लग जाते हैं। अब प्रयोग कामयाब हो जाये इसी आस में मशीन शुरू करने का सोचते हैं।मशीन की डिजाईन पियानो के कीबोर्ड जैसी थी जिसमे तीन बटन थे। पहला ओन ऑफ का दूसरा सन्देश भेजने का और तीसरा सन्देश प्राप्त करने का था। जैसी ही मशीन वो ओन करते हे हरी नीली रौशनी शुरू हो जाती हैं। फिर रमेश दुसरे बटन को दबाते हैं और सन्देश में अपने प्लेनेट के चित्र , लोगो के रहन सहन और आवाज़े ऑडियो विडियो सब एक डिजिटल तरंगो के माध्यम से स्पेस में छोड़ देते हैं ताकि अगर कोई एलियन हैं तो वो हमारे सन्देश को समझ पाए ।
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ऐसे वो एक महीने तक सन्देश भेजते रहते हैं पर रिजल्ट कुछ नहीं निकलता।एक रात को वो महसूस करते हैं जैसे कोई उन्हें कुछ कहना चाहता हो। जब वो आँखे खोलते हैं तोह अपने आपको नए ग्रह में आते हैं। वो ये देखकर चोंक जाते हैं ये तोह वही हरा ग्रह हैं। वहा के लोग दिखने में काफी भयानक थे, चोकोर आँखे लम्बे पतले नाख़ून और हरी मोटी खाल। वो जैसे ही रमेश की तरफ आगे बढते हैं वो डर के मारे किसी तरह जान बचाकर भागते हैं। उस ग्रह की दुनिया हरे भरे मीथेन गैस से बने घरो से बनी थी। डॉ साहब के पास किसी तरह मास्क निकल आया और वो स्पेस शिप खोजते हैं। उस प्लेनेट में एक प्रयोग शाला नज़र आती हैं जहा वो गार्ड से बचते हुए पिछली खिड़की से दाखिल हो जाते है। वहा वो एक स्क्रीन पर वही सन्देश देखते हैं जो उन्होंने स्पेस में भेजा था । तभी वो एलियंस वही आ जाते हैं और एक मास्क पहनकर अपनी भाषा में अनुवाद करते हुए बोलते हैं – हमे आपका सन्देश मिला इसलिए हम आपको यहाँ लाये हैं कैसे लगी हमारी दुनिया। डॉ रमेश डर के मारे कुछ कह नहीं पाते इसलिए वो फिर भागने का प्रयास करते हैं। एलियन जैसी ही उनकी तरफ आगे बढते हैं, वो चिल्ला पढ़ते है – ‘ बचाओ बचाओ मुझे छोड़ दो’’ तभी एक आवाज़ गूंजती हैं – ‘’ मालिक उठ जाओ, ऑफिस जाने का टाइम हो गया। ये तो रामू था उनका सहायक ।डॉ रमेश बोलते हैं – वो एलियन कहा गए? रामू बोलता हैं – कोण से एलियन आप ज्यादा काम न करे आराम भी करे। डॉ रमेश आज भी उस बात को याद करके सोचते हैं – क्या वो सच था या सपना? आपको क्या लगता है दोस्तों आप फैसला करे?
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