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गंगाजल से हो सकता है कई बीमारियों का इलाज-Latest health news in hindi 2018

Latest health news in hindi 2018

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हम एक से बढ़कर एक health जगत की खबरें प्रकाशित करते हैं। पेश है इसी कड़ी में आज हम “गंगाजल से हो सकता है कई बीमारियों का इलाज”Latest health news in hindi 2018 प्रकाशित कर रहे हैं . आशा है आपको ये खबर पसंद आएगी
गंगाजल से हो सकता है कई बीमारियों का इलाज
सनातन से गंगा का पानी शुद्ध ओर निर्मम माना जा रह है. गंगाजल सबसे पवित्र नदी मानी जाती है. खास कर हिन्दू के लिए इस नदी के अलग ही मायने हैं.फिर चाहे वो शुभ कार्यक्रम हो या फिर अशुभ कार्यक्रम दोनों ही स्थिति में गंगा जल का उपयोग होता है.गंगाजल की तुलना अमृत से की जाती है और इसको कितना पवित्र माना गया है, लेकिन अब यह भी साबित हो गया है कि इसके पानी में कई बीमारियों का इलाज भी है.
पशुओं और इंसानों में निमोनिया, मस्तिष्क ज्वर के अलावा बर्न, घाव, सर्जरी व यूरिनल इन्फेक्शन का कारण बनने वाले क्लबसेला, स्यूडोमोनास, स्टेफाइलोकॉकस आदि बैक्टीरिया के चार बैक्टिरियोफाज (जीवाणुभोजी) को गंगा के जल से हिसार स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (एनआरसीई) के वैज्ञानिकों की टीम ने खोज निकाला है.संस्थान के अन्य वैज्ञानिक डॉ. बीसी बेरा और डॉ. आरके वैद्य भी लगे हुए हैं. यह कार्य यूं तो घोड़ों और पशुओं पर ही हो रहा है, लेकिन काफी ऐसे बैक्टेरिया हैं जिनका असर इंसानों और पशुओं पर होता है जिनमें क्लबसेला प्रमुख है. इनके फाज भी इंसानों के लिए कारगर साबित होंगे. इस तरह का काम पोलैंड, नीदरलैंड, स्कॉटलैंड, चीन, कनाडा में चल रहा है और जियोर्जिया में तो फाज थैरेपी भी होने लगी है, लेकिन भारत में इतने बड़े स्तर पर यह पहला काम है.

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जियोर्जिया में तो फाज थैरेपी भी होने लगी है, लेकिन भारत में इतने बड़े स्तर पर यह पहला काम है.
बता दे की एनआरसीई के वैज्ञानिकों ने अभी तक गढ़गंगा, गंगोत्री के अलावा वाराणसी के औड़िहार से लिए गए जल पर शोध किया है. अब हर की पौड़ी के जल व मिट्टी के अलावा अन्य स्थानों के गंगाजल पर भी शोध किया जाएगा. वैसे ये तो सभी जानते हैं की गंगा की उद्भव स्थान बहुत ही पवित्र होने के साथ साथ अनेक जड़ी बूटी ओर पेड़ो से हो कर गुजरती है, जिसकी वजह से गंगा जल अमृत माना जाता है साथ ही साथ गंगा जल में किसी तरह के वैक्ट्रिया नहीं होते.
बता दे की गंगाजल से मिले कुल आठ बैक्टिरियोफाज के अलावा विभिन्न स्थानों की मिट्टी व डंग आदि से 100 के करीब विभिन्न बैक्टिरियोफाज निकालकर एक फाज बैंक बना लिया है, लेकिन क्लबसेला के फाज का चूहों पर सफल परीक्षण भी हो चुका है. एनआरसीई के निदेशक डाॅ. बीएन त्रिपाठी ने बताया कि करीब साढ़े तीन साल पहले वर्ष 2013 में केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. तरुणा आनंद ने भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र के डेवलपमेंट आफ बैक्टिरियोफाज रिपोजिटोरी विषय पर शोध शुरू किया. जिसका परिणाम है की आज शोध बहुत आगे तक बढ़ चूका है, भविष्य में गंगा जल से बहुत सारे बिमारियों का इलाज हो सकेगा.
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