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तेज हवा में सोता हूँ-Latest motivational story on desikahaniyaan

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यूँ तो जब नींद आती है तो इंसान कहीं भी सोने को तैयार हो जाता है, लेकिन भला किसी इंसान को तेज आंधी में सोते देखा है, आपका जवाब आएगा नहीं… बात भी सही है, इसी पर आधारित है यह कहानी…..
बात दरसल यह थी की एक किसान था जिसके पास बहुत बड़ा खेत और मवेशी के साथ साथ मुर्गियां भी थी, वह सब कुछ अपने खेत में बने बाड़े में रखता था, लेकिन किसान अकेले इतने बड़े खेत का ना तो रखवाली कर पाता था ना ही इतना खेत में मजदूरी कर पाता था, इसलिए उसने सोचा क्यों ना एक मजदुर रख लू. इसलिए उसने मजदुर रख लिया, लेकिन कोई भी मजदुर उसके खेत में टिक नहीं पाता था, जबकि मजदुर के लिए घर वह खेत में ही बना दिया था, जिसमे करीब करीब सारी सुविधाएँ थी, लेकिन कोई भी मजदुर वहां नहीं रह पाता था, इसका वजह था हमेशा आने वाला भयंकर तूफ़ान जो हर मजदुर को डरा दिया करता था.आये दिन आंधी –तूफ़ान की वजह से , कोई काम करने को तैयार नहीं होता था .
किसान ने एक दिन शहर के अखबार में इश्तहार दिया कि उसे खेत में काम करने वाले एक मजदूर की ज़रुरत है . किसान से मिलने कई लोग आये लेकिन जो भी उस जगह के बारे में सुनता , वो काम करने से मना कर देत . भला इतने आंधी तूफान में रह कर कौन काम करता, इसलिए सभी मना कर रहे थे. अंततः एक सामान्य कद का पतला -दुबला अधेड़ व्यक्ति किसान के पास पहुंचा .

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किसान ने उससे पूछा , “ क्या तुम इन परिस्थितयों में काम कर सकते हो ?”
“ ह्म्म्म , बस जब हवा चलती है तब मैं सोता हूँ .” व्यक्ति ने उत्तर दिया .
जवाब सुन कर किसान को आस्चर्य हुआ और वह समझ भी नहीं पाया की आखिर व्यक्ति ने क्या कहा? लेकिन उसे मजदुर की जरुरत थी इसलिए उसे काम कर रख लिया. व्यक्ति मेहनती था, और मेहनत से सारा काम करता था. किसान उसकी मेहनत देख कर खुश था. एक रात अचानक से तेज हवा आया,किसान समझ चूका था की आंधी तूफान आने वाला है, इसलिए वह लालटेन ले कर मजदुर की झोपड़ी की तरफ दौड़ा, और मजदुर को जगाते हुए कहा की “ जल्दी उठो , देखते नहीं तूफ़ान आने वाला है , इससे पहले की सबकुछ तबाह हो जाए कटी फसलों को बाँध कर ढक दो और बाड़े के गेट को भी रस्सियों से कस दो .” किसान चीखा .
मजदूर बड़े आराम से पलटा और बोला , “ नहीं जनाब , मैंने आपसे पहले ही कहा था कि जब हवा चलती है तो मैं सोता हूँ !!!.”
यह सुन किसान का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया , जी में आया कि उस मजदूर को गोली मार दे , पर अभी वो आने वाले तूफ़ान से चीजों को बचाने के लिए भागा .
किसान खेत में पहुंचा और उसकी आँखें आश्चर्य से खुली रह गयी , फसल की गांठें अच्छे से बंधी हुई थीं और तिरपाल से ढकी भी थी , उसके गाय -बैल सुरक्षित बंधे हुए थे और मुर्गियां भी अपने दडबों में थीं. बाड़े का दरवाज़ा भी मजबूती से बंधा हुआ था .सभी चीजें बिलकुल व्यवस्थित थी. नुक्सान होने की कोई संभावना नहीं बची थी.किसान अब मजदूर की ये बात कि “ जब हवा चलती है तब मैं सोता हूँ ”…समझ चुका था , और अब वो भी चैन से सो सकता था .
सही बात है आये हुए मुसीबत की सामना धर्य से करना चाहिए, साथ ही साथ जिंदगी में आने वाले तूफान की तैयारी भी पहले से कर लेना चाहिए, जिससे कभी भी मुसीबत का सामना करने में आसानी हो…
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