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आलसी गधा-Lazy Donkey moral story in hindi language for kids

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एक नगर में एक व्यापारी रहा करता था। वह छोटा-मोटा सामान शहर ले जाता और बेचकर जो भी मुनाफा होता उसी में अपना गुजर बसर करता। शर में सामान ले जाने के लिए उसने एक गधा पाल रखा था। उस गधे को बहुत देखरेख करता था। पर गधा तो था एक नंबर का आलसी वह पौस्टिक आहार खाकर सिर्फ सोना चाहता था। एक दिन उसका मालिक यानी व्यापारी नमक का बोरा गधे के पीठ पर लादकर शहर की ओर चला। गधा धीरे -धीरे लड़खड़ाकर चल रहा था। रास्ते में एक छोटी पुलिया पड़ती थी। गधा निचे बाह रही नाले में गिर पड़ा नमक पानी में घुल गया। भार एकदम हल्का हो गया। गधा खुश था। उसेपानी में गिरना बहुत भाया। दूसरे दिन व्यापारी नमक का बोरा गधे की पीठ पर लादकर शहर की ओर चला आया। गधा उसी पुलिया पर जब पहुंचा तो जानभूझकर पानी में गिर पड़ा। सारा नमक पानी में घुल गया। वह अब मजे में चल सकता था व्यापारी बेचारा सिर पीटकर रह गया। पर उसने गधे को सजा नहीं दी। ऐसा कई बार हुआ। व्यापारी समझ गया कि उसका गधा देखने में जितना सीधा लगता है उतना सीधा है नहीं। उसकी चालाकी उसे समझ में आ गई। उसने गधे के पीठ पर रुई के गट्ठर को लादा और बेचने हेतु शहर की ओर चला। गधा पुलिया के पास पहुंचा आदतन जानभूझकर पानी में गिर पड़ा ,पर इस बार उसकी चालाकी भारी पड़ा रुई पानी में भींगकर भारी हो गया।
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गधे की हालत देखने लायक थी। उसकी चालाकी बेकार गई। इसके बाद से उसने आलसपन छोड़ी और मिहनत करने लगा। आलस्य हमेशा ठीक नहीं होता। इंसान जीवन में कभी प्रगति नहीं कर सकता इस कहानी से यही सीख मिलती है। [२]सही उत्तर -एक दिन बादशाह अकबर का दरबार लगा था। बीरबल भी दरबार में उपश्थित थे। बादशाह ने एक लकड़ी का टुकड़ा रखा और सभी से पूछा ,की बिना काटे लकड़ी को छोटा कैसे किया जा सकता है। सारे सभासद चुप था भला बिना कांटे-छंटे लकड़ी को छोटा कैसे किया जा सकता है। अंततः बीरबल उत्तर देने के लिए तैयार हुए बीरबल ने एक लकड़ी का बड़ा सा टुकड़ा छोटी लकड़ी के पास रखा और बादशाह की ओर मुखातिब होकर बोला ,-बादशाह लीजिये हो गई ना आपकी लकड़ी छोटी। बाड़शाल बीरबल की बुद्धिमानी पर बहुत खुश हुए। बीरबल के हाजिर जवाबी का कोई मुकाबला नहीं कर सकता था

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