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वैश्या की एक अनोखी प्रेम कथा- love story in hindi in short

हम एक से बढ़कर एक प्रेम कहानियां प्रकाशित करते हैं। पेश है इसी कड़ी में आज हम “वैशेया की एक अनोखी प्रेम कथा” love story in hindi in short प्रकाशित कर रहे हैं . आशा है आपको ये खबर पसंद आएगी.


वैशेया की एक अनोखी प्रेम कथा
कोई अपनी ख़ुशी से अपना जिस्म नहीं बेचता था, ये तो उनकी मज़बूरी होती है. ये लाइन अक्सर हम फिल्मों में सुनते थे और ये हकिता है. वैश्यों की एक अलग ही दुनिया होती है, उनकी जिन्दगी में प्यार और ख़ुशी की कोई जगह नहीं होती. ये सब जिन्दा हो रहती है, लेकिन जीवित नहीं रहती. ये लोग सिर्फ दरिंदों की जिस्म की भूखे को मिटती हैं और दुसरे समाज की बच्चियों को भूखे दरिंदों से बचाती हैं. फिर भी ये जिस्म के भूंखे दरिन्दे किसी न किसी बच्ची या लड़की ने अपनी भूख मिटा ही लेते हैं.
इस वैश्यों के पास भी एक दिल होता है, जो धड़कता है, ये बात मुझे तब पता चली जब मेरे दोस्त को एक वैश्य से प्यार हो गया. ये प्यार कोई जिस्म की भूंक मिटाने के लिए नहीं बल्कि हमेशा साथ निभाने वाला था. एक बार की बात है, मैं और मेरे दोस्त रोहित की शहर को जॉब लग गई थी. अक्सर हम लोग रात के समय ऑफिस से अपने कमरे जाते थे. हमारा कमरा एक छोटे से मोहल्ले में था, रस्ते में एक चकला पड़ता था, जहाँ कई सारी वेश्या रहती थीं. जब हम लोग रात को उसी रास्ते से अपने कमरे आते तो हम लोगों को रोज एक लड़की मिलती जो अपने ग्राहकों का इन्तेजार करती, वो हम लोगों को इशारे से बुलाती थी, लेकिन हम लोग कभी भी उसके पास नहीं गए.
एक दिन बारिश तेज़ हो रही थी, मैं और मेरा दोस्त पैदल उसी रस्ते से जा रहे थे, सुनसान रास्ता था. तेज़ बारिश हो रही थी. हम लोग एक छाते के सहारे अपने कमरे की और बढ़ रहे थे, मेरी नजर उसी बस स्टॉप पर गई, जहाँ वो लकड़ी रोज खाड़ी रहती थी, लेकिन आज वो वहां नही थी. हम लोग आंगे बढ़े तभी एक बीमार सी धीमी आवाज आई, “मेरी मदद कर दो”. मैं और रोहित ने देखा की पास ही एक टपरे के पास वही लड़की पड़ी हुई, थी जो रोज रात को हमें मिलती थी. रोहित उसके पास जाने लगा, लेकिन मैंने उसे मना किया. वो नही माना, जब वो उसके पास गया तो देखा कि उसकी तबियत बहुत ज्यादा ख़राब है, उसकी तबियत इतनी ज्यादा खराब थी कि वो बेहिशी की हालत में थी. मुझे भी दया आ गई और हम दोनों ने मिल कर उसे अस्पातल में भर्ती करवा दिया. डॉक्टर बोल रहे थे कि अगर ज्यादा देर हो जाती तो शायद ये नहीं बच पाती. सुबह उसे होश आ गया. रोहित ने गुस्से में उससे पूंछा कि जब तुम्हारी तबियत ख़राब थी तो क्यों घर के बाहर निकली अपना जिस्म बेचने के लिए, तब उसने बोला कि मुझे कोई शौक नही है अपना जिस्म बेचने का, मज़बूरी है, जो हमसे ये करवाती है. उसने हमारे धन्यवाद किया और बोला कि वहां से और भी लोग निकले लेकिन किसी ने भी मेरी मदद नही कि सिर्फ़ आप लोगों ने मेरी मदद की. इसके बाद उसने अपनी सारी दस्तना सुना दी, उसकी दास्तान सुनने के बाद रोहित और मेरी आँखों में आंसू आ गए, एक हफ्ते तक रोहित ने उसकी खूब सेवा कि जब हो होस्पिटल से डिस्चार्ज हुई तो रोहित ने उसे अपने कमरे में रख लिया और बोला आज के बाद तुम कभी भी अपना जिस्म नही बेचोगी,
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कई दिन तक जब वो हमारे साथ रहने लगी तो लोग तरह तरह की बातें करने लगे. एक दिन रोहित ने उससे शादी कर ली और उसे एक छोटी सी नौकरी में लगवा दिया. आज दोनों बेहद खुश है और उनके दो बच्चे हैं. जब भी मैं उस लड़की से मिलता हूँ तो एसा कभी नहीं लगा कि वो पहले एक वेश्या थी.
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