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वो सुहानी रात-love story in hindi language short

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हम एक से बढ़कर एक love story प्रकाशित करते हैं। पेश है इसी कड़ी में आज हम “कमियां ही निखारती है”love story in hindi language short प्रकाशित कर रहे हैं . आशा है आपको ये story पसंद आएगी

वो सुहानी रात……….
इंसान की जिंदगी में कभी एक पल ऐसा भी आता है जिसे वह कभी नहीं भूल पाता, या यूँ कह ले की वह खुशनुमा पल कभी भूलना नहीं चाहता है. कुछ तो उस पल के सहारे पूरी जिंदगी काट लेते हैं. ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ.मैंने बैंगलोर में रह कर मास्टर डिग्री की पढ़ाई पूरी की और पढ़ाई पूरी करके दिल्ली आ गया.अब मैं दिल्ली में रहता था,वहीँ अपना कोचिंग सेंटर शुरू कर दिया, शुरू शुरू में काफी मेहनत करना पड़ा. मुझे कोई जानता था नहीं था, हाँ इतना था की मेरे ही शहर का एक लड़का था जो मेरे साथ कोचिंग सेंटर खोला था, मेरा काम कोचिंग का मार्केटिंग करना था, बच्चो को कोचिंग तक लाना और फिर उसका एडमिशन लेना था, जबकि मेरा दोस्त जो मेरे ही शहर का था वो बच्चो को पढ़ता था, मैं भी समय निकाल कर बच्चो को पढ़ाया करता था, हलाकि मुझे ज्यादा पढ़ाना नहीं पड़ता था, लेकिन मैंने कोचिंग की मार्केटिंग बखूबी निभायी. मैंने कुछ बैनर और पम्पलेट बनवाये और जहाँ कोचिंग खोला था वहां पम्पलेट चिपकाया, और बैनर भी लगवा दिया. उसके बाद कुछ पम्पलेट स्कूल के बच्चो में भी बाँट दिया, धीरे धीरे करके बच्चे आने लगे, और बच्चो की संख्या भी बढ़ने लगी. देखते देखते दो से चार और चार से सीधे 20 बच्चे हो गए, बच्चो की संख्या बढ़ने लगी तभी मुझे मेरे एक क्लास मेट ने बैंगलोर से मुझे कॉल किया और बताया की एक अंतिम परीक्षा होना बाकी है, मैं हैरान हो गया, क्योँकि मैंने तो सारी परीक्षा दे दी थी फिर कौन सी परीक्षा बांकी रह गयी, तो क्लासमेट ने बताया की एक प्रेटिकल परीक्षा होना है उसी के बाद रिजल्ट आएगा, तो मुझे याद आया की प्रेटिकल परीक्षा तो वाकई मैंने दी ही नहीं, मैंने आनन् फानन में दिल्ली से बैंगलोर का टिकट बनवाया लेकिन कन्फर्म टिकट नहीं मिला, खैर मुझे परीक्षा देने जाना ही था इसलिए मैंने ट्रैन पकड़ ली, हलाकि बैंगलोर से दिल्ली आने का टिकट कन्फर्म मिल गया था, इस बात की ख़ुशी थी की भले जाने का नहीं मिला लेकिन आने का मिल गया था. खैर किसी तरह मैं बैंगलोर पहुँच गया और परीक्षा दे दी, परीक्षा भी अच्छी हुई, मैं खुश था, काफी दिनों के बाद सभी साथी से मिला था. वापसी में मैं जब ट्रैन पर चढ़ा तो मेरे अगल बगल की सीट मुझे खाली मिली , मुझसे आस्चर्य हुआ की आते समय इतनी भीड़ और जाते समय भीड़ ही नहीं थी, इसलिए मैं आराम से बेग रह कर सो गया, कुछ देर के बाद ट्रैन खुली तो पाया की कोई नहीं आया था, लेकिन अगले ही स्टेशन पर एक सुरीली आवाज वाली लड़की ने मुझे जगाया, और बोलै यह उसका सीट है, मैंने भी नींद में कह दिया की सारा सीट तो खाली है कहीं बैठ जाओ, उसने फिर मुझे हिलाया, मेरा नींद खुल गया, नींद खुलते ही मेरी नजर उस लड़की पर पड़ी तो मैं उसे देखता रह गया, कमाल की सुन्दर लड़की थी, फिर मैंने अपने चारो तरफ नजर घुमाई तो पाया सीट भरा हुआ था, मैं अचानक से उठ कर बैठ गया, मैंने फिर कहा,आपकी सीट है तो बैठ जाओ, फिर मैंने अपना टिकट निकला तो पाया की वही सीट मुझे भी मिली है अब तो मैं ताजुब हो गया की दोनों को एक ही सीट, फिर मैंने बोगी नंबर पूछा तो वही बोगी था, फिर यह कैसे हो सकता था,

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तब पता चला की मेरा टिकट कन्फर्म नहीं हुआ था, इसलिए यह सीट हम दोनों की थी मतलब आधा आधा. अब साफ़ था की दिल्ली तक हम दोनों को सीट शेयर करके जाना था, मैं उठ कर बैठ ही गया था, वह भी बगल में बैठ गयी थी, मैंने पूछा कहा जाना है, लड़की ने बताया की उसे दिल्ली जाना है, सही कहु तो मन में तो लड्डू फूटे, पूरा साथ इस खूबसूरत लड़की के साथ जाना था, वाकई मैं बहुत खुश हुआ, लेकिन ये क्या धीरे धीरे रात हुई तो लड़की ने सोने की इक्छा जताई, लड़की वह भी इतनी खूबसूरत मैं मना नहीं कर पाया और वह सो गयी मैं पूरी रात बैठ कर ऊंघते रहा और मेरा मन का लड्डू अचानक से मीठा के बदले मुझे करवा लगने लगा, कहाँ यह रात मेरे लिए सुहानी होने वाली थी कहाँ यह रात मेरे लिए दुखदायी हो गयी, क्योँकि मुझे सारी रात बैठ कर गुजारनी पड़ी. मैं बैठे बैठे ही ऊंघ रहा था, लाइट बंद हो गए थे, उसका चेहरा भी नहीं दिख रहा था, जैसे तैसे मैंने वह रात काटी, सुबह हुआ तो लड़की उठी और बाथरूम चली गयी, हलाकि मैं पहले ही फ्रेश हो गया था, रात भर तो सोते जागते हुए ही काटे थे, इसलिए सुबह सुबह फ्रेश हो गया, लड़की के बाथरूम जाते ही मैं भी सीट पर पसर गया, सोचा कम से कम पैर तो सीधा कर लू, यह सोच कर मैंने ज्यूँ ही पैर सीधा की मुझे नींद आ गयी और मैं कब सो गया मुझे पता ही नहीं चला, कुछ देर के बाद कॉफ़ी वाले के आवाज से नींद खुली तो देखा लड़की बैठी हुई है, मैं भी उठ कर बैठ गया, और कॉफ़ी वाले से कॉफ़ी लिया साथ ही साथ लड़की से भी कॉफ़ी पूछा, लड़की ने हाँ में सर हिला दिया, मैंने दोनों कॉफ़ी का दाम दे दिया, दोनों चुप चाप कॉफ़ी पिने लगे खिड़की से बाहर देखने लगे, कुछ देर के बाद चलते चलते ट्रैन अचानक से रुक गयी, और काफी देर तक रुकी रही आखिर क्यों यह पता नहीं चल रहा था, ट्रैन 4 घंटे तक रुकी रही, अंत में मैं ट्रैन से बाहर उतर कर इंजन के पास पहुंचा और ड्राइवर से पूछा तो पता चला की आगे बिजली की लाइन टूटी हुई है जिसकी वजह से ट्रैन रुकी हुई है, लाइन बनते ही ट्रैन चल पड़ेगी, मैं लौट कर आया तो लड़की ने मुझे पूछा क्या वजह है तो मैंने ड्राइवर की बात बता दी. और उसके बाद हम दोनों में बात चीत शुरू हो गयी, बात चीत से पता चला की लड़की बैंगलोर में ही रहती है और दिल्ली एक कंपनी में इंटरव्यू देने जा रही है, मेरे बारे में पूछा तो मैंने बता दिया की मैं दिल्ली में कोचिंग चलाता हूँ. काफी देर तक इधर उधर की बात हुई, मैंने अपने कॉलेज की कहानी सुनाई उसने अपने कॉलेज की कहानी सुनाई, फिर काफी देर के बाद ट्रैन भी चल पड़ी. बिच बिच हम दोनों कुछ ना कुछ खाते भी रहे, हलाकि खाने का सारा पैसा मैं ही दे रहा था. लेकिन मुझे उस पर खर्च करना अच्छा लग रहा था. मैंने लड़की से उसका नाम पूछा तो उसने सोनल बताया, मेरे मुँह से निकाल पड़ा बिलकुल सोना की तरह हो भी और वैसा ही नाम भी है, उसने मुस्कान दी उसकी मुस्कान बहुत प्यारी लगी, फिर मैंने पूछा दिल्ली में कहाँ रुकना है, उसने अपने दोस्त के यहाँ रुकने को बताया, साथ ही यह भी बताया की उसे दिल्ली के बारे में कुछ नहीं पता, उसकी दोस्त स्टेशन उसे लेने आ जाएगी . मैंने ओके में सर हिला दिया. धीरे धीरे शाम होने को आयी, और ट्रैन अब तक 10 घंटे लेट हो चुकी थी, शाम में भी कॉफ़ी पीते पीते हम दोनों में रिश्ते और समाज को ले कर बात होने लगी, और रात होते होते टॉपिक आ गया प्यार का. मैंने ही उसका मन में क्या चल रहा है यह जानने के लिए प्यार का टॉपिक शुरू कर दिया, उसने बताया की उसका बॉय फ्रेंड बैंगलोर में ही जॉब करता हैं, यह सुनना था की मेरे दिमाग में वह सारे पैसे जुड़ने लगे जो मैंने उस पर खर्च किये थे, ये क्या मेरा दिमाग मुझे ही कोस रहा था, दिल से भी आह निकल रही थी, मुझे गुस्सा आ रहा था की मैंने पहले ही उसके बारे में क्यों ना पूछ लिया, अब तो मेरा दिल रोने को कर रहा था? एक बार फिर रात आयी, और उसने फिर सोने की इज्जात मांगी, मुझे तो लगा की मैं उसे वहां से भगा दू और खुद सो जाओ, लेकिन लड़की थी क्या करता? मैं चुप चाप वहां से उठ गया और बोगी के गेट पर चला गया, वहां गेट खोल कर बैठ गया, और हवा खाने लगा, मेरा मन भारी हो गया था, लेकिन गेट पर आ रही ताज़ी हवा मेरे मन और दिल को सुकून दे रही थी, कहाँ मैंने सोचा की यह रात के साथ साथ सफर भी सुहानी होने वाली थी कहाँ मैं अकेला ही बैठा हुआ था, तभी कुछ देर के बाद लड़की मेरे पास आयी और बोली गेट पर मत बैठो, मैंने पूछा, क्यों? लड़की ने कहा की गिर जाओगे, मैंने कहा, तुम्हे मेरी बहुत चिंता हो रही है, जिसे सुन कर लड़की चौंक गयी, उसने कहा एक इंसान दूसरे इंसान के बारे में ही सोचता है इसलिए बोल दिया. मैंने भी कहा, मेरी चिंता ना करे और सो जाए मैं ठीक हूँ, लड़की वापस सीट पर जा कर सो गयी , और मैं पूरी रात गेट पर बैठ कर ही गुजार दिया. अगली सुबह दिल्ली आ गयी और मैं पहले ही सामान गेट पर ले आया था, और चुप चाप ट्रैन से बिना उससे मिले उतर गया.वापस अपने रूम पर पहुंचने के बाद मेरे दिमाग में सिर्फ यह ही घूम रहा था की अगर सोनाली का बॉयफ्रेंड बैंगलोर में था तो वह दिल्ली क्यों जॉब के लिए आ रही थी? और सच मुच उसका बॉयफ्रेंड था तो पूरी रास्ता उसने ना कभी अपने बॉय फ्रेंड से बात की ना ही उसके बारे में कुछ बताया, क्या उसने मुझसे झूठ बोला? और अगर झूठ बोला तो आखिर क्यों? आज भी मैं उस सफर को नहीं भूल पाया………..

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