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सच्चा दोस्त- motivational stories in hindi new

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हम एक से बढ़कर एक Motivational story प्रकाशित करते हैं। पेश है इसी कड़ी में आज हम “सच्चा दोस्त”motivational stories in hindi new प्रकाशित कर रहे हैं . आशा है आपको ये story पसंद आएगी
सच्चा दोस्त…….
दो दोस्त थे, संजीव और पंकज. दोनों में बहुत ही गहरी दोस्ती थी. दोनों साथ साथ पढ़ते थे, दोनों साथ साथ खेलते थे. एक बार कॉलेज की छुट्टियों में दोनों दोस्त ने पहाड़ घूमने का प्लान बनाया, और दोनों शिमला की तरफ चल पड़े. दोनों दोस्त शिमला से आगे जंगल की तरफ बढ़ गए, दोनों अपने साथ खाने-पिने का सामान और जरुरत की सारी वस्तुओं को लिए थे. फिर दोनों जंगल में रुक कर एक जगह खाने लगे. खाना खाते खाते दोनों में किसी बात को ले कर बहस शुरू हुई और बहस धीरे धीरे विवाद का रूप ले लिया, फिर पंकज ने गुस्सा में आ कर संजीव को थप्पड़ मार दिया, जिससे संजीव दंग रह गया, लेकिन उसने पंकज को कुश नहीं बोला, और सिर्फ जमीन पर यह लिख दिया की, “आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे थप्पड़ मारा”. उसके बाद दोनों चुप चाप बढ़ने लगे, दोनों एक दूसरे से कोई बात नहीं कर रहे थे.हलाकि दोनों साथ साथ चल रहे थे लेकिन बिना कुछ बोले और दोनों में थोड़ी दुरी थी. तभी संजीव का तेज आवाज आया, जिसे सुन कर पंकज चौंक गया,उसने पीछे मूड कर देखा तो पाया की संजीव दलदल में गिर गया था, पंकज बिना देर किये हुए, लकड़ी का भाग संजीव की तरफ बढ़ाया, जिसे पकड़ कर संजीव दलदल से बाहर आ गया, दलदल से बाहर आने के बाद, संजीव ने एक नुकीले पत्थर से पेड़ पर खुरच-खुरच कर यह लिखा की, ” आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने, मेरी जान बचाई” यह पढ़ कर पंकज आस्चर्य से बोला की मैंने जब थप्पड़ मारा, तब तुमने मिटटी पर लिखा और जब जान बचाई तब पेड़ पर लिखा, ऐसा क्यों? इस पर संजीव ने बोला, ” जब कोई तकलीफ दे तो हमें उसे अन्दर तक नहीं बैठाना चाहिए ताकि क्षमा रुपी हवाएं इस मिटटी की तरह ही उस तकलीफ को हमारे जेहन से बहा ले जाएं , लेकिन जब कोई हमारे लिए कुछ अच्छा करे तो उसे इतनी गहराई से अपने मन में बसा लेने चाहिए कि वो कभी हमारे जेहन से मिट ना सके .” यह सुन कर पंकज के आँखों में आसूं आ गए और उसने संजयव को गले लगा दिया.
और बोला, तुम ही मेरे सच्चे दोस्त हो……
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