Articles Hub

New Hindi Motivational stories for the young audiance

1.
(विजेता कैसे बने)
New Hindi Motivational stories for the young audiance,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language
एक समय बात है एक तालाब में बहुत सारे मेंढक रहते थे। सरोवर के बीचों बीच एक बहुत पुराना का खम्भा भी लगा हुआ था। खम्भा बहुत ऊँचा था और उसकी सतह भी चिकनी थी।
एक दिन मेंढकों के दिमाग में आया की क्यों ना एक प्रतियोगिता करवाई जाये। इसमें भाग लेने वाले को खम्भे पर चढ़ना होगा, और जो सबसे पहले ऊपर पहुंच जायेगा, उसे विजेता घोषित कर दिया जायेगा। तो उन्होंने प्रतियोगता का दिन फिक्स कर दिया।
प्रतियोगिता का दिन आ गया, खम्भे के चारो और बहुत भीड इक्कठी हो गयी। आसपास के इलाकों से भी कई मेंढक इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचे। माहौल में सरगर्मी थी। हर तरफ शोर ही शोर था
प्रतियोगिता शुरू हुई…….
लेकिन खम्भे को देखकर भीड में से किसी भी मेंढक को यकीन नहीं हुआ, की कोई भी मेंढक इस खम्भे के ऊपर पहुंच पायेगा।
चारो ओर यही शोर हो रहा था -“अरे ये बहुत कठिन हैं ” “वो कभी भी इसे नहीं जीत पाएंगे” “ऊपर पहुंचने का तो कोई सवाल ही नहीं हैं, इतने चिकने खम्भे पर नहीं चढ़ा जा सकता ” और यह हो भी रहा था की जो भी मेंढक कोशिश करते , वो थोडा ऊपर जाकर फिसलने के कारण नीचे गिर जाते।
कई मेंढक तो बार बार गिरने के बावजूद अपने प्रयास में में लगे हुए थे।
पर भीड तो अभी भी चिल्लाये जा रही थी, “ ये नहीं हो सकता, ये असंभव हैं ” तो अब जो भी मेंढक उत्साहित थे, कोशिश कर रहे थे , वो भी ये सुन सुनकर हताश हो गए और उन्होंने अपना प्रयास करना छोड़ दिया।
लेकिन उन्ही मेंढकों के बीच एक छोटा सा मेंढक था, जो बार बार गिरने पर भी उसी जोश के साथ ऊपर चढ़ने में
लगा हुआ था ….वो लगातार ऊपर की ओर बढ़ता रहा और आखिरकार वह खम्भे के ऊपर पहुच गया और इस प्रतियोगिता का विजेतां बना।
उसकी जीत पर सभी को बडा आश्यर्य हुआ, सभी मेंढक उसे घेर कर खडे हो गए और पूछने लगे ,” तुमने ये असंभव काम कैसे कर दिखाया, कैसे तुमने सबको पीछे छोड़ कर जीत प्राप्त करी?
तभी पीछे से किसी ने बोला … “अरे उससे क्या पूछते हो , ये तो बहरा है
आपको समझ आया वो कैसे जीता ?
जी हां उसके आसपास जितने भी टांग खींचने वाले थे, उनकी आवाज उसको नहीं सुनाई दी, जिससे वो नकारात्मक नहीं सोच पाया, और वो अपने लक्ष्य पर ज्यादा फोकस कर पाया, और जीत गया।

Moral
हमारे अंदर भी अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की काबिलियत होती हैं, और हम शुरुआत भी करते हैं। लेकिन अपने आसपास के ज्ञान चंदो के कारण और अपने नकारात्मक माहौल के कारण, हम अपना काम या तो शुरू नहीं करते हैं या फिर बीच में ही छोड़ देते हैं। तो दोस्तों आपको जो भी पीछे रखने वाली आवाजे हैं वो कोई भी, कुछ भी हो सकती हैं। चाहे वो दोस्त हो, रिश्तेदार हो, या फिर आप खुद हो। इन सबको ignore करना ही होगा। अपने आपको एक मजबूत इंसान बनाते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हरसंभव प्रयास करने चाहिए। यदि आपने नकारात्मकता से दुरी बना ली, तो आपको सफलता के शिखर पर पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता।
और भी प्रेरक कहना पढ़ना ना भूलें==>
बदलाव की एक प्रेरक कहानी
चालक भेड़िये और खरगोश की प्रेरक कहानी
कोयल और मोर की प्रेरणादायक कहानी
2.
( सिकंदर और फ़कीर)
New Hindi Motivational stories for the young audiance,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language
सिकंदर जब भारत लौटा, तो एक फ़कीर से मिलने गया तो सिकंदर को आते देख फ़कीर हंसने लगा। इस पर सिकंदर ने मन में सोचा कि ये तो मेरा अपमान है और फ़कीर से कहा “या तो तुम मुझे जानते नहीं हो या फिर तुम्हारी मौत आई है। जानते हो मैं कौन हूँ, मैं हूँ सिकंदर महान।
इस पर फ़कीर और भी जोर जोर से हंसने लगा।उसने सिकंदर से कहा-“मुझे तो तुम्हारे में कोई महानता नजर नहीं आती मैं तो तुम्हे बड़ा दीन और दरिद्र देखता हूँ।”
तो सिकंदर ने फ़क़ीर से कह- “तुम पागल हो गये हो, मैंने पूरी दुनिया को जीत लिया है।
तो इस पर उस फ़कीर ने कहा-“ऐसा कुछ नहीं है तुम अभी भी साधारण ही हो फिर भी तुम कहते तो मैं तुमसे एक बात पूछता हूँ कि मान लो तुम किसी रेगिस्तान मे फंस गये और दूर दूर तक तुम्हारे आस पास कोई पानी का स्त्रोत नहीं है और कोई भी हरियाली नहीं है जहां तुम पानी खोज सको, तो तुम एक गिलास पानी के लिए इस राज्य में से क्या दे सकते हो।
सिकंदर ने कुछ देर सोच विचार किया और उसके बाद बोला कि मैं अपना आधा राज्य दे दूंगा तो इस पर फ़कीर ने कहा अगर मैं आधे राज्य के लिए न मानू तो।
सिकंदर ने कहा इतनी बुरी हालत में तो मैं अपना पूरा राज्य दे दूंगा।
फ़कीर फिर हंसने लगा और बोला कि तेरे राज्य का कुल मूल्य है ” बस एक गिलास पानी ” और तू ऐसे ही घमंड से चूर हुआ जा रहा है। वक़्त पड़ जाये तो एक गिलास पानी के लिए भी तेरा राज्य काफी नहीं होगा। फिर रेगिस्तान में खूब चिल्लाना महान सिकंदर महान सिकंदर रेगिस्तान में कोई नहीं सुनेगा। सारी महानता का बस तुमने एक भ्रम पल रखा है।
मैं आशा करता हूँ की आपको ये story आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्। ऐसी ही और कहानियों के लिए देसिकहानियाँ वेबसाइट पर घंटी का चिन्ह दबा कर सब्सक्राइब करें।

Tags-New Hindi Motivational stories for the young audiance,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language

80%
Awesome
  • Design
loading...
You might also like