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new motivational story in hindi- चालक भेड़िये और खरगोश की प्रेरक कहानी

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देसिकहानियाँ में हम हर दिन एक से बढ़कर एक अजब गजब प्रेरणादायक कहानी प्रकाशित करते हैं। इसी कड़ी में हम आज “new motivational story in hindi ” प्रकाशित कर रहे हैं। आशा है ये आपको अच्छी लगेगी।
लेखक – अशफाक

एक बहुत ही जंगल में एक चालक भेंड़िया रहता था, उससे सब डरते थे, क्योंकि वो रोज किसी न किसी का शिकार करता रहता था. इसकी एक खास बात ये थी कि वो जिसका भी शिकार करता, इसकी भनक किसी भी जानवर को नहीं लगती थी. वो चालाकी से पहले अपने शिकार को जाल में फंसता था और फिर उसे चुपचाप से खा जाता था. जंगल के सभी भेड़िये की चालाकी से वाकिफ हो चुके थे. कोई भी उसके आसपास भी नहीं मंडराता था. अब भेड़िया भी परेशान रहने लगा, उसने अब अपने इलाके को बदलने की सोंची और दुसरे इलाके में पहुच गया. यहाँ उस चालाक भेड़िये ने खरोश की एक बहुत ही बड़ी फैमली से दोस्ती कर ली. खरगोश और भेड़िये की दोस्ती बहुत गहरी हो गई, इसके बाद चालक भेड़िया अपनी चालकी से खरगोश की बड़ी सी फैमली से रोज एक खारोगोश खा जाता और किसी को भी पता नही चलता, भेड़िया एकदम मज़े में जी रहा था, फिर एक दिन खरगोश की पुरनी दोस्त एक बकरी ने भेड़िये को खारोगोश के बच्चे को खाते देख लिए. बकरी ने तुरंत ये बाद खारोगोश के सरदार से ये बात की.

अब सभी खरगोश परेशान हो गए, उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि इस चालाकी भेड़िये का क्या करें. तभी बकरी के दिमाग में एक जबरदस्त आईडिया आया उसने सभी खरगोश को एक बड़ा सा ग़द्दा खोदने के लिए बोला. दो से तीन दिन में सभी खरगोश मिलकर एक बड़ा सा ग़द्दा खोद दिए. फिर बकरी ने उस गद्दे में खूब सरे कांटे डाले और उपर से हरी पतियाँ बिछा दी. इसके बाद एक खारोगोश के बच्चे को वहां बिठा दिया.

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जब चालक बेड़िया वहां पहुँचा तो उसने खगोश के बच्चे को देख कर खुश हो गया और उसे पकड़ने के लिए अंगे बढ़ा, जिसे ही भेड़िया खरगोश के बच्चे को पकड़ने के लिए आंगे बढ़ा वेसे ही बकरी के बिछाये जाल में फंस गया और गद्दे में गिर गया. गद्दे में पड़े कांटे उस भेड़िये के पुरे शरीर में घुस गए. और फिर बाकिर और खारोगोश उस गद्दे में मिट्टी डालने लगे और गद्दे को पुर दिया. वहीं कांटे गाड़ने की वजह से चालक भेड़िये की मौत हो गई. इसके बाद फिर किसी खरगोश की जान नहीं गई. खरगोश और बकरी की दोस्ती और गहरी हो गई.

कहानी से सीख, “आप आपने जीवन में कभी भी किसी को आपने से कम नहीं समझना ”

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