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प्रतिशोध-कहानी थोड़ी पुरानी है पर है बिलकुल सच्ची-old but true hindi story

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एक छोटे से शहर में एक सेकेंडरी स्कूल था। उस स्कूल में मोहन आठवीं का छात्र था। पढ़ने में बिलकुल साधारण। किसी तरह पास कर जाता। टिफ़िन में या छुट्टियाँ होने पर बच्चे मैदान में खेला करते। उन दिनों फुटबॉल खेलने का प्रचलन था। उस बड़े से फील्ड में किनारे किनारे एक गधा घास चारा करता था। पता नहीं कि सका था ,शायद लावारिस था। यूँ तो जानवर [कुछ को छोड़कर]सरल और सीधे होते हैं पर अकारण बार -बार छेड़ने पर आक्रामक हो जाते हैं। मोहन अक्सर उस गधे को छेड़ता। कभी पत्थर फेंकता तो कभी छुरछुरी जलाकर उसे परेशान करता। गधा बेचारा हेंचि-हेंचू की आवाज लगाकर सरपट भागता। कभी -कभी दुलत्ती भी झाड़ता। एक दिन तो उसने हद ही कर दी। गधे के नाजुक अंगों पर डंडे से प्रहार करने लगा। बेचारा गधा दर्द से बिलबिला उठा। पहले तो उसने कास के दुलत्ती झाडी फिर भागने लगा। गधा आगे तो मोहनपीछे -पीछे अचानक गधा रुक गया और क्रोध में पीछे मुड़कर देखा।फिर क्या हुआ की गधा तेजी से पीछे पलटा और मोहन के बालों को मुहं में कसकर दबाकर घसीटने लगा। फिर उसने अपनी चाल तेज कर दी। मोहन दर्द से चिल्ला रहा था। बहुत लोग इक्कट्ठे हो गए।
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दृश्योच लिए तो यह लड़का कितना बहुत भयावह था। खून सेलेथपथ मोहन और सरपट भागता गधा बहुत कोशिश के बाद मोहन को गधे के मुंह से उसके सिर को छुड़ाया गया। सिर का उपरी चमड़ा पूरी तरह से उधड़ गया था और सारे बाल उखड चुके थे। इमरजेंसी वार्ड में उपचार शुरू हुआ। हालत नाजुक थी। किसी तरह से उसकी जान बचाई गई। कई टाँके पड़े। वह करीब ६ महीने बिस्तर पर पड़ा रहा। स्वस्थ होने पर स्कूल आने लगा। उसका स्वरुप बदल चुका था सिर पर एक भी बाल नहीं थे। पर मने ना माने ,एक बदलाव आया था। उसकी स्मरण शक्ति बढ़ गई थी। वह मिनटों में सब याद कर लेता। वह अब मंद बुद्धि से कुशाग्र बुद्धि का हो गया था। अपने क्लास में हमेशा फर्स्ट आता। गधे ने इतनी कृपा कर दी थी क्योंकि सभी कहते की ,’देखोगधे ने सभी बाल नोच लिए तो यह लड़का कितना तेज हो गया। पर इसे कतई कोई ना करें यह अपनीजान से खिलवाड़ करना है। पशु भी हमारी तरह ही होते हैं उन्हें अकारण कभी नहीं पीड़ा पहुंचi नी चाहिए। किसी को सताना बहुत बुरी बात है। सबके प्रति। मंगलमय भाव रखें चाहे वह इंसान हो या पशु।

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