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कोई तो है-real ghost story books in hindi

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हम एक से बढ़कर एक Horror Kahaaniyan प्रकाशित करते हैं। पेश है इसी कड़ी में आज हम “कोई तो है”

नीरज अपने मम्मी पापा के साथ भोपाल में रहता था, उसके पापा सरकारी जॉब में थे, उनको सर्कार की तरफ से ही क्वाटर मिला हुआ, क्वाटर बड़ा और अच्छा था, सभी खुश थे. नीरज स्कूल में पढता था, इस बार गर्मी की छुट्टियों में उसे अपने दादी घर जाना था, यह सोच सोच कर वह खुश हो रहा था, काफी दिनों से वह अपने दादी घर नहीं गया था. कुछ दिनों के बाद उसके स्कूल में गर्मी छुट्टी होने वाली थी, वह अपना समान पैक करने लगा था, उसे पता था की इस बार उसके पापा दादा जी यहाँ ले जाएंगे, जहाँ वह गाँव में मस्ती करेगा .वहां कोई रोक टोक करने वाला नहीं था पूरा एक महीना उसे मजा करना है, यही सोच सोच कर वह खुश हो रहा था. तभी उसके पापा ने बताया की कोई जरुरी काम आ गया है जिसकी वजह से गाँव का प्लान कैंसिल करना होगा, नीरज उदास हो गया, उसकी मम्मी समझ गयी, उसकी मम्मी ने उसके पापा से बात की और नीरज को ले कर गाँव चली गयी, नीरज को पहुंचा कर वह वापस भोपाल आ गयी, इधर नीरज दादा दादी से मिल कर बहुत खुश हुआ, उसका गाँव वाला घर और भी बड़ा था, बहुत बड़ा था और रहते थे सिर्फ दादा और दादी, इसलिए काफी कमरे तो बंद ही रहते थे, कुछ कमरे तो ऐसे थे की कभी खुले भी ना हो, लेकिन नीरज के आने के बाद घर में रौनक आ गयी, नीरज ज्यादातर कमरे खोल कर उसके सारे सामान को देखता और उसमे से जो उसे पसंद आता वह ले लेता. गाँव में ही रहने वाले पड़ोस के बच्चे उसके दोस्त भी बन गए. एक बार शाम में सभी दोस्त ने घर में ही आँख मिचोली का खेल खेलने का मन बनाया.जिसमे एक चोर बनता था और बाकी सभी छिप जाते थे, और चोर को ढूँढना होता था, खेल रोचक हो चला था,
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इतना बड़ा घर कोई कहीं छिप सकते था. खेलते खेलते अब अँधेरा होने वाला था, तभी नीरज एक कमरे में छिपने गया तो उसने देखा की एक आलिशान ड्रेसिंग टेबल है जिसमे लगा शीशा भी बहुत बड़ा था, वह उसी ड्रेसिंग टेबल के पीछे छिप गया, तभी उसने पाया की कोई महिला पुकार रही हैपहले तो उसे लगा की उसकी दादी बुला रही है, लेकिन बाद में उसे पता चला की यह आवाज उसकी दादी की नहीं है, यह आवाज उसके आस पास से ही आ रही है, उसकी समझ में यह नहीं आ रहा था की भला इस रूम में उसके अलवाए कौन है, क्योँकि उसके आस पास कोई नहीं था, तभी उसकी नजर शीशा पर पड़ा तो वह देख कर हैरान हो गया है क्योँकि उसके सामने शीशा में कोई औरत थी, गौर से देखने पर यह पता चला की वही आवाज भी शीशा से ही आ रही है, अब तो नीरज डर गया उसने डरते हुए पूछा तुम कौन हो? उस औरत ने बताया की मैं इस शीशे की भूत हूँ और तुमने मुझे देखा इसलिए तुम्हे मरना होगा, जिसे सुन कर नीरज और डर गया और वह उस कमरे से भाग गया. अब तो उसे रातो को नींद नहीं आ रही थी, उसे लग रहा था की वह औरत उसे बुला रही है कल सुबह जब यह बात उसने दादा जी को बताया तो दादा जी ने वहम का नाम दिया.लेकिन ंजीराज ने उस शीशा में साफ़ साफ़ एक महिला को देखा था.उसके कानो में उस औरत की आवाज गूंज रही थी की उसे मरणा होगा, कल हो कर नीरज ने उस शीशे पर गंगा जल ज्यूँ ही छिड़का की शीशा टूट कर बिखर गया, उसके बाद वह औरत किसी को दिखाई नहीं दी और ना ही उस औरत के बारे में कुछ पता नहीं चला.
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