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real life romantic love story in hindi-वो लड़की याद आती है.

हम हर रोज आपको एक लव स्टोरी सुनाते हैं। पेश है इसी कड़ी में ये real life romantic love story in hindi. आशा है ये आपको पसंद आएगी
धनदीप और उसके माता-पिता तथा उसकी छोटी बहन इस मोहल्ले में नया-नया शिफ्ट हुए थे। छोटा सा मोहल्ला था,बहुत ही शांत था। जिस फ्लैट में वो शिफ्ट हुआ था, उसके कैंपस में बहुत सारे पेड़ लगे हुए थे,इसलिए शाम को वो कैंपस में टहल लेता था, कुछ दिन तक टहलने के बाद वो एक शाम पास के ही मार्किट में घूमने का मन बना कर घर से निकला तो सामने के घर में खड़ी एक लड़की पर नजर पड़ी,बहुत ही सुन्दर थी वो,लम्बे-लम्बे बाल,गोरा रंग,आँखे बड़ी-बड़ी,एकहरा शरीर बहुत ही सुन्दर थी वो,धनदीप कुछ देर के लिए ठहर सा गया और लड़की को देखने लगा,लड़की की भी नजर जब उस पर पड़ी तो दोनों की नजरे आपस में टकराई, और लड़की ने नजर निचे करके धीरे से अपने घर के अंदर चली गयी,लड़की के घर के अंदर जाने के बाद धनदीप भी मार्किट की तरफ बढ़ गया। चुकी वो इस मोहल्ले में नया था,इसलिए उसकी जान पहचान किसी के साथ ना होने की वजह से वो लड़की के बारे में कुछ नहीं जान पाया। जब वो मार्किट से वापस आया तो लड़की को फिर से अपने घर के सामने पाया,और वो कुछ देर के लिए वापस अपने घर के सामने खड़ा हो गया,लेकिन वापस से नजर मिलने के कारन लड़की फिर वापस अपने घर के अंदर चली गयी।अगली शाम धनदीप फिर अपने घर के सामने जा कर खड़ा हो गया, सोचा कहीं आज फिर उस लड़की के दीदार हो जाये,और कुछ देर के बाद लड़की फिर उसके सामने नजर आने लगी,लेकिन धनदीप ये बात जान चूका था की लड़की ने उसे देख लिया तो वापस अपने घर के अंदर चली जाएगी,इसलिए वो उसकी नजर से दूर खड़ा हो कर उसे देख रहा था,काफी देर तक उस लड़की का मनमोहक सौंदर्य देखने के बाद वो सामने आया ही था की लड़की की नजर उस पड़ी और वो घर के अंदर चली गयी, काफी शाम हो जाने के कारन धनदीप भी अपने कमरे में चला गया और बेचैनी से अगली शाम का इंतजार करने लगा, अगली शाम को वो बहुत ही गौर से लड़की को देख रहा था,तभी उसकी छोटी बहन ने आवाज लगाई और उसकी आवाज की वजह से सामने वाले घर की लड़की को ये एहसास हो गया की धनदीप उसे देख रहा है और वो घर के अंदर चली गयी
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उसे घर के अंदर जाता देख धनदीप की छोटी बहन भी समझ गयी की उसका भाई जरूर लड़की को देख रहा था,इसलिए उसके बुलाने पर भी वो नहीं आया,धनदीप ने थोड़ा सा चिढ कर बोला,क्या बात है? इस पर उसकी छोटी बहन ने कहा,इतनी देर से बुला रही हूँ लेकिन तुम्हारा ध्यान तो स्वेता की तरफ था। धनदीप ने उससे पूछा कौन स्वेता ? इस पर उसकी बहन ने कहा,जिसे तुम इतनी गौर से देख रहे थे। तो पता चला की उस लड़की का नाम स्वेता है,लेकिन उसकी समझ में ये नहीं आया की उसकी छोटी बहन की दोस्ती उससे कब हो गयी? उसने अपनी छोटी बहन से पूछना चाहा,लेकिन उसकी छोटी बहन ने बताने से मना कर दिया,काफी मनाने के बाद उसकी छोटी बहन ने बताया की उसका नाम स्वेता है,वो पास के ही कॉलेज में पढ़ती है,उसके पापा और मम्मी दोनों जॉब में हैं,वो घर में अकेली रहती है, उसका एक भाई भी है,जो बाहर रहता है । उसे भी बाहर जा कर पढ़ने का मन करता है,लेकिन उसके मम्मी-पापा नहीं जाने देते हैं,इसलिए वो यहीं पढ़ती है।वो लोग भी इस मोहल्ले में नए आये हैं,जिसकी वजह से उनका भी जान-पहचान किसी से नहीं है, इतनी जानकारी धनदीप के लिए काफी था,मतलब साफ़ था की लड़की अकेली बोर होती है,और शायद उसका कोई बॉय फ्रेंड भी नहीं है,इसलिए वो शाम को अपने घर के सामने खड़ी हो कर अपना शाम बाहर देख कर बिताती है । लेकिन धनदीप उससे दोस्ती कैसे करे,ये सोच रहा था। उसने अपनी छोटी बहन से कहा स्वेता से दोस्ती करवा दो,इस पर स्वेता ने उसकी तरफ अजीब नजरो से देखा और वहां चली गयी।मतलब साफ़ था की उसकी बहन स्वेता से दोस्ती करवाने के मूड में नहीं थी।एक शाम धनदीप अपने घर के सामने खड़ा हो कर स्वेता का इंतजार कर रहा था,लेकिन स्वेता.नजर नहीं आ रही थी,तभी उसने देखा स्वेता तैयार हो कर घर से निकल रही है,स्वेता को घर से निकलता देख,धनदीप उसके पीछे हो लिया,सोचा मोहल्ले से बाहर निकलने के बाद उससे बात करेगा । स्वेता आगे-आगे चल रही थी और धनदीप उसके पीछे,कुछ देर के बाद स्वेता सब्जी के दुकान पर खड़ी हो कर सब्जी लेने लगी,धनदीप भी उसके पास जा कर खड़ा हो गया और धीरे से हेलो बोला,बदले में स्वेता ने भी हाई बोला । उसने अपना नाम धनदीप बताया,स्वेता ने बोला उसे पता है,उसकी छोटी बहन ने बताया था। धनदीप ने कहा आप बहुत सुन्दर हो,इस पर स्वेता शरमा गयी,और बोली इसलिए लगातार मुझे देखते हैं। अब शरमाने की बारी धनदीप की थी,मतलब साफ़ था की धनीप उसे देखता है,ये बात स्वेता को पता थी । धनदीप ने बोला हाँ मैं आपको रोज शाम को देखता हूँ,आप मुझे अच्छी लगती हैं,क्या आप मुझसे दोस्ती करेंगी? इस पर स्वेता ने कहा सोच कर बताउंगी,फिर उसने कहा दोस्ती एक शर्त पर करुँगी,जब आप अपनी बहन को बोलो मुझे स्कूटी सीखा दे,क्योंकि मैंने उसे बोला था,उसने मना कर दिया,धनदीप ने कहा,वो नहीं सिखाएगी तो मैं सीखा दूंगा । स्वेता ने कहा लेकिन स्कूटी तो आपकी बहन की है। धनदीप ने कहा इसका टेंशन आप ना लो,कल शाम को पास के ग्राउंड में आ जाइएगा,मैं सीखा दूंगा। लड़की ने ओके में सर हिला दिया।शाम को धनदीप स्कूटी ले कर पास के ग्राउंड में स्वेता का इंतजार करने लगा,कुछ देर के बाद स्वेता आयी और बोला सीखा दो। धनदीप ने उसे पहले स्कूटी के बारे में बताया,और उसे कैसे चलाया जाता है,ये भी बताया। कुछ दिनों तक रोज स्वेता,धनदीप से स्कूटी सीखती रही और इन दिनों धनदीप स्वेता के बहुत ही करीब आ गया। लेकिन क्या धनदीप ने अपने प्यार का इजहार स्वेता से किया और स्वेता ने उसके प्यार को एक्सेप्ट किया,इससे जानने के लिए कहानी की अगली कड़ी पढ़े
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