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चंद्रधर शर्मा गुलेरी की लघु कथाएं-small new stories in hindi language

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न्याय घंटा-दिल्ली में अनंगपाल नाम का एक बड़ा रॉय था। उसके महल के द्वार पर पत्थर के दो सिंह थे। उसने इन सिंहों के पासक घंटी लगवाई ताकि जिन्हे न्याय चाहिए ,वे इसे बजा दें। रॉय पीड़ितों को सुनता और उचित न्याय देता। एक दिन की बात है कि एक कौआ घंटी पर आकर बैठ गया और घंटी बजाने लगा। रॉय के पूछने पर कहा कि वे सिंह के दांतो से मांस निकाल लिया करते हैं पर पत्थर के सिंह तो शिकार करते नहीं तो फिर इन्हे नित्य जीविका कहाँ से मिले ?रॉय को लगा कि कौवे के गुहार में सच्चाई है ,क्योंकि वह पत्थर के सिंहो के पास बैठा है। रॉय ने आज्ञा दी कि कई भेंड़ -बकरियां मारी जाएँ ताकि कौओं को भोजन मिल जाये .
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[२]- भूगोल -एक स्कूल में इंस्पेक्टर का दौरा हुआ। शिक्षक भयभीत थे लिहाजा वह क्लास में बच्चों को भूगोल रटाने लगे। उन्होंने समझाया कि पृथ्वी गोल है। अगर इंस्पेक्टर पूछे कि पृथ्वी का आकार कैसा है तो मैं तुम्हे सुंघनी का डिब्बा दिखलाऊंगा,उसे देखकर सही उत्तर देना। गुरूजी की डिबिया गोल थी। जब इंस्पेक्टर क्लास में पहुंचे तो एक बिद्यार्थी से यही प्रश्न पूछा। गुरूजी ने गलती से अपनी जेब से चौकोर डिबिया निकाल कर दिखाई। एक ,लड़का ने तपाक से उत्तर दिया ,’बुधवार को पृथ्वी चौकोर होती है बांकी सब दिन गोल ‘

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[३]- जन्मांतर कथा -एक कबाड़ी था जिसका नाम काहिल था। वह काठ की कावड़ लिए कई जगह घूमता था। उसकी पत्नी का नाम सिंहला था। उसने एक दिन अपने पति से कहा कि वह देवाधिदेव -युगादिदेव की पूजा करे। ताकि जन्मांतर में दरिद्रता ना पावें पति यह सुनकर बोला -तु तो पगली हो गई है। मैं इसमें क्या कर सकता हूँ ?तब पत्नी ने नदी -जल और पुष्पों से पूजा -अर्चना की। संयोगवश उसी दिन वह हैज़ा से मर गई। और जन्मांतर में राजकन्या और राजपत्नी हुई। एक दिन अपने नए पति के साथ उसी मंदिर में आई ,तो अपने पूर्व पति दरिद्र कबाड़िये को देखकर मूर्छित हो गई। उसने एक दोहे में कहा ,-जंगल की पत्ती और नदी जल सुलभ था तो भी तूँ नहीं लाया। है रे किस्मत ,तेरे तो तन पर कपड़ा भी नहीं है और मैं रानी हो गई। कबाड़ी ने जन्मांतर कथा की पुष्टि की।

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