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एक माँ की कहानी-Story of a mother a new short inspirational Story by anderson

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माँ अपने नन्हे से बच्चे के पास बैठी बहुत उदास थी ,उसे हर पल डर था कि बच्चा कहीं मर ना जाय . उसका मासूम चेहरा पीला पड़ चुका था तथा आँखे बंद थी। वह गहरी साँसें ले रहा था। दरवाज़े पर दस्तक हुई , वह अपने साथ एक ओढ़ना लाया था हालांकि वह खुद सर्दी से काँप रहा था। उधर माँ ने नन्हे बच्चे का हाथ थाम लिया। तुम सोचते हो कि मैं इसे रख सकुंगी ?उसने पूछा। क्या ईश्वर इसको मुझसे छीनकर ले तो नहीं जाएगा ? वह बूढ़ा आदमी जो साक्षात मृत्यु था ने अजीब ढंग से सर हिलाया अभिप्राय हाँ या ना दोनों में हो सकते थे। विगत तीन दिनों से वह ठीक से सोइ नहीं थी आंसूं उसके गालो से होते हुई टपकने लगे। उसने चारो तरफ देखा बूढ़ा अपने साथ बच्चे को भी ले गया था माँ बच्चे को लेने हेतु घर से बाहर दौड़ी। रास्ते में जो मिलता बस पूछती -मेरे बच्चे को किधर ले गया है ,बस इतना बता दो। काले लबादे में औरत ने उसे उन सारे गीत सुनाने को कहा जो उसने उस नन्हे बच्चे को सुनाये थे उसने कहा -मैं रात हूँ तुम कितना अच्छा गाती हो मैंने तुम्हारे आंसूं देखे है। माँ ने गाना गाया आंसू के साथ। रात ने कहा -दाहिने तरफ देवदार के घने जंगल में जाओ क्योंकि मैंने मृत्यु को उसी तरफ बच्चे के साथ जाते हुए देखा है। कांटो की एक झाडी मिली बर्फ से लाडे हुए उसने उससे बच्चे के बारे में पूछा। झाडी ने कहा -मैं तुम्हे तबतक नहीं बताउंगी जबतक तुम अपनी छाती से मुझे गरम नहीं करती . माँ के छाती में कांटे घुस गए थे रक्त की बड़ी -बड़ी बुँदे बहने लगे. कांटे वाली ने बता दिया कि वह किस रास्ते जाय वह एक झील के पास पहुंची और बर्फ पर लेट गई। नहीं यह कभी नहीं हो सकता तुम्हारी दोनों आँखें इतनी साफ़ हैं कि जैसे मैंने कभी नहीं देखी यदि तुम इसमें अपने आंसू डाल दो तब तुम्हे एक बड़े ग्रीन हाउस तक पहुंचा दूंगी जहां मृत्यु फूल और फल उगाती है। उसके दो बून्द आंसू दो अमूल्य मोती बन गए। पर उसने अपनी आँखे गवां चुकी थी एक बूढी औरत मिली तुम्हारे बच्चे को मई नहीं जानती और तुम देखोगी कैसे ,तुमने तो अपनी आँखे भी गवां चुकी हो . इसके बाद वह उसे महान शीशे के घर में ले गई। जहां ना जाने कितने फूल और फल लगे थे।
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हर फूल और वृक्ष का नाम था। प्रत्येक मानव जीवन था। जिसमे मानव जीवन का ह्रदय धड़क रहा था। उसने एक नन्हे पौधे में अपने बच्चे को पहचान लिया। फूल मत छुओ -बुढ़िया चिल्लाई मृत्यु कुछ ही मिनटों में आनेवाली है। तुम यहां कैसे पहुँच गई -मृत्यु ने पूछा -मैं माँ हूँ ना तुम मेरे विरुद्ध कुछ नहीं कर सकती — परन्तु दयालु परमात्मा तो कर सकता है -उसने कहा। उसने दोनों हाथों से दोनों फूलों को पकड़ लिए। तुम कहती हो कि तुम दुखी हो फिर दूसरी माँ को क्यों दुखी करने पर तुली हो ?दूसरी माँ ? उसने फूलों को छोड़ दिया। इन दोनों फूलों में से एक तुम्हारे बच्चे का है। इनमे से मेरा कौन सा बच्चा है ,मुझे जल्दी बताओ माँ चिल्लाई। मृत्यु ने कहा -तुम अपना बच्चा वापस चाहोगी या इसे उस स्थान पर ले जाऊँ जिसे तुम नहीं जानती। तुम्हारी इच्छा सर्वोत्तम है। मुझे मत सुनो। उसने अपने सर को अपने छाती पर गिरा लिया। मृत्यु उसके बच्चे के साथ अनजाने स्थान को चली गई।

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