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एक माँ की कहानी-Story of a mother a new short motivational story in hindi language

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एक माँ की कहानी -एंडरसन -एक माँ अपने छठे बच्चे के पास बैठी थी। वह डर रही थी कि कहीं बच्चा मर ना जाए। बच्चा कठिनाई से साँसे ले रहा था। दरवाज़े पर दस्तक हुयी और एक बूढ़ा आदमी अंदर आया वह सर्दी से काँप रहा था। तुम सोचते हो मैं इसे रख सकुंगी ?उसने पूछा। ईश्वर इसको मुझसे छीन तो नहीं ले जाएगा > वह बूढ़ा आदमी जो साक्षात मृत्यु था ने अजीब ढंग से सिर हिलाया। जिसका अभिप्राय हाँ और ना दोनों हो सकते थे। बाहर एक औरत बर्फ में काले कपडे पहनी थी उसने कहा -‘मृत्यु तुम्हारे साथ कमरे में थी। उसे तुम्हारे बच्चे के साथ जाते हुए देखा था। जिसे वह एक बार ले जाती है वह लौट के कभी नहीं आता। मुझे रास्ता बता दो मैं ढूंढ कर ले आउंगी माँ ने कहा। जंगल काफी घना था चौराहे पर वह नहीं जानती थी कि कौन सा रास्ता पकडे। क्या तुमने मृत्यु के साथ मेरे बच्चे को जाते हुए देखा है ?उसने झाडी से पूछा। मै तब तक तुम्हे नहीं बताउंगी जब तक तुम मुझे अपनी छाती से गरम नहीं कर देती मै बर्फ में जम रही हूँ उसने झाडी को सीने से लगा लिया। नुकीले कांटे उसके सीने में घुसने लगे थे। रक्त की बुँदे बहने लगे थे। झाडी में ताज़े पत्ते निकल आये। एक दुखी माँ का सीना कितना गरम होता है उसने उसे बता दिया कि वह कौन सा रास्ता पकडे। वह एक बड़ी झील के पास आई। वह उसे पार नहीं कर सकती थी। झील ने कहा तुम अपने आंसुओं को मुझमे डाल दो उसके आंसू झील में गिरकर दो अमूल्य मोती बन गए। वह मृत्यु को कहाँ ढूढ़े। इन दो फूलों में से समझाया – प्रत्येक मानव के पास जीवन पुष्प है। मृत्यु आएगी और जल्दी ही उनका पुनरारोपण होगा। तुम अपने बच्चे के दिल की धकड़न को पहचानो। वह उसे मृत्यु के महान शीशे के घर में ले गयी जहां फूल और वृक्ष आपस में गुंथे उग रहे थे। दुखी माँ तमाम छोटे -छोटे पौधे पर झुकी और और लाखों पौधों में अपने बच्चे के दिल को पहचान लिया। यही है वह -एक केसर के फूल को इंगित करते हुए वह चिल्लाई। एक बर्फीला झोका आया और अंधी माँ ने महसूस किया कि मृत्यु आ पहुंची है। तुम यहां कैसे आ गयी > मृत्यु ने पूछा। -मै माँ हूँ। उसने कहा। तुम मेरे विरुद्ध कुछ नहीं कर सकती -मृत्यु ने कहा। पर दयालु परमात्मा तो कर सकता है ना ? मेरा बच्चा मुझे लौटा दो। माँ ने कहा। वह रो रही थी। उसे हाथ मत लगाओ। मै तुम्हारे सारे फूलों को नष्ट कर दूंगी अगर तुमने मेरे बच्चे को मुझे नहीं दिया। तुम कहती हो कि तुम दुखी हो और एक दूसरी माँ को दुखी करने पर तुली हो। यह दूसरी माँ आँखे है। मैंने इसे झील से निकाला है -मृत्यु ने कहा। इनमे से हत भाग्य और भाग्यवान फूल कौन सा है ? दोनों ही परमात्मा की इच्छाएं है। मृत्यु ने कहा। इनमे से एक फूल तुम्हारे बच्चे का है। माँ डरकर जोर से चीख उठी। तुम अपना बच्चा वापस चाहोगी या मै इसे ऐसे स्थान पर ले जाऊँ जिसे तुम जानती तक नहीं। माँ ने घुटने टेके और प्रभु का स्मरण करने लगी। यदि मै तुम्हारे इच्छा के विरुद्ध प्रार्थना करती हूँ तो उसे मत सुनो। तुम्हारी इच्छा सदा सर्वोत्तम है। मुझे मत सुनो ,मुझे मत सुनो — उसने अपने सिर को अपने सीने में गिरा लिया। मृत्यु उसके बच्चे के साथ अनजाने स्थान को चली गई। -एंडरसन -एक माँ अपने छठे बच्चे के पास बैठी थी। वह डर रही थी कि कहीं बच्चा मर ना जाए। बच्चा कठिनाई से साँसे ले रहा था। दरवाज़े पर दस्तक हुयी और एक बूढ़ा आदमी अंदर आया वह सर्दी से काँप रहा था। तुम सोचते हो मैं इसे रख सकुंगी ?उसने पूछा। ईश्वर इसको मुझसे छीन तो नहीं ले जाएगा > वह बूढ़ा आदमी जो साक्षात मृत्यु था ने अजीब ढंग से सिर हिलाया। जिसका अभिप्राय हाँ और ना दोनों हो सकते थे। बाहर एक औरत बर्फ में काले कपडे पहनी थी उसने कहा -‘मृत्यु तुम्हारे साथ कमरे में थी। उसे तुम्हारे बच्चे के साथ जाते हुए देखा था। जिसे वह एक बार ले जाती है वह लौट के कभी नहीं आता। मुझे रास्ता बता दो मैं ढूंढ कर ले आउंगी माँ ने कहा। जंगल काफी घना था चौराहे पर वह नहीं जानती थी कि कौन सा रास्ता पकडे। क्या तुमने मृत्यु के साथ मेरे बच्चे को जाते हुए देखा है ?उसने झाडी से पूछा। मै तब तक तुम्हे नहीं बताउंगी जब तक तुम मुझे अपनी छाती से गरम नहीं कर देती मै बर्फ में जम रही हूँ उसने झाडी को सीने से लगा लिया। नुकीले कांटे उसके सीने में घुसने लगे थे। रक्त की बुँदे बहने लगे थे। झाडी में ताज़े पत्ते निकल आये। एक दुखी माँ का सीना कितना गरम होता है उसने उसे बता दिया कि वह कौन सा रास्ता पकडे। वह एक बड़ी झील के पास आई। वह उसे पार नहीं कर सकती थी। झील ने कहा तुम अपने आंसुओं को मुझमे डाल दो उसके आंसू झील में गिरकर दो अमूल्य मोती बन गए। वह मृत्यु को कहाँ ढूढ़े। इन दो फूलों में से समझाया – प्रत्येक मानव के पास जीवन पुष्प है। मृत्यु आएगी और जल्दी ही उनका पुनरारोपण होगा। तुम अपने बच्चे के दिल की धकड़न को पहचानो। वह उसे मृत्यु के महान शीशे के घर में ले गयी जहां फूल और वृक्ष आपस में गुंथे उग रहे थे। दुखी माँ तमाम छोटे -छोटे पौधे पर झुकी और और लाखों पौधों में अपने बच्चे के दिल को पहचान लिया। यही है वह -एक केसर के फूल को इंगित करते हुए वह चिल्लाई। एक बर्फीला झोका आया और अंधी माँ ने महसूस किया कि मृत्यु आ पहुंची है। तुम यहां कैसे आ गयी > मृत्यु ने पूछा। -मै माँ हूँ। उसने कहा। तुम मेरे विरुद्ध कुछ नहीं कर सकती -मृत्यु ने कहा। पर दयालु परमात्मा तो कर सकता है ना ?
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मेरा बच्चा मुझे लौटा दो। माँ ने कहा। वह रो रही थी। उसे हाथ मत लगाओ। मै तुम्हारे सारे फूलों को नष्ट कर दूंगी अगर तुमने मेरे बच्चे को मुझे नहीं दिया। तुम कहती हो कि तुम दुखी हो और एक दूसरी माँ को दुखी करने पर तुली हो। यह दूसरी माँ आँखे है। मैंने इसे झील से निकाला है -मृत्यु ने कहा। इनमे से हत भाग्य और भाग्यवान फूल कौन सा है ? दोनों ही परमात्मा की इच्छाएं है। मृत्यु ने कहा। इनमे से एक फूल तुम्हारे बच्चे का है। माँ डरकर जोर से चीख उठी। तुम अपना बच्चा वापस चाहोगी या मै इसे ऐसे स्थान पर ले जाऊँ जिसे तुम जानती तक नहीं। माँ ने घुटने टेके और प्रभु का स्मरण करने लगी। यदि मै तुम्हारे इच्छा के विरुद्ध प्रार्थना करती हूँ तो उसे मत सुनो। तुम्हारी इच्छा सदा सर्वोत्तम है। मुझे मत सुनो ,मुझे मत सुनो — उसने अपने सिर को अपने सीने में गिरा लिया। मृत्यु उसके बच्चे के साथ अनजाने स्थान को चली गई।

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