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द लास्ट लीफ-the last leaf short motivational story in hindi language

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वाशिंगटन चौक एक छोटा सा मोहल्ला जिसमे कई बस्तियां जाल की तरह बसी हुयी हैं। कहीं कहीं तो सड़क अपना ही रास्ता दो -तीन बार काट जाती हैं। इस सड़क के बारे में एक कलाकार ने सोचा की कोई व्यापारी यदि तगादा करने आये तो उसे इस रास्ते में अपने आप से मुठभेड़ हो जाएगी और बिना एक पैसा वसूले ही उसे वापस लौटना पडेगा इस विचित्र ,’ग्रीनविच ग्राम में दुनिया भर के कलाकार आकर जमा होने लगे। और अपनी -अपनी गृहस्थी बसा ली। एक मकान में सु और झांसी का स्टूडियो था। दोनों की मुलाक़ात आठवीं सड़क के एक सस्ते होटल में हुयी थी। नवंबर की सर्दियों में निमोनिआ ने दस्तक डाला इस बिमारी ने बीसियों लोगों को अपना ग्रास बना डाला। मिस्टर निमोनिअ’ ने स्त्रियों के प्रति भी कोई रियायत नहीं की और उसने जैंसी पर भी हमला बोल दिया। वह बेचारी चुपचाप निसहाय अवस्था में लोहे के पलंग पर पड़ी रहती। और अपनी खिड़की से सामने के मकान की कोरी दीवारों को देखा करती। इलाज़ कर रहे डॉक्टर ने एक दिन कहा ,-‘उसकी जीने की संभावना बहुत कम है।
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जब तक उसकी इच्छाशक्ति मज़बूत है तबतक वह जीवित रह सकती है। पर इस लड़की पर तो सवार हो गया है कि वह अब अच्छी नहीं होगी। सु ने कहा ,’नेपल्स की खाड़ी का चित्र बनाने की इच्छा है ?’मैं पूछ रहा था की उसके जीवन में जीने की तीव्र इच्छा शेष है क्या ?’जैसे कोई नौजवान ?सु बोली ,-‘पुरुष और प्रेम -छोडो भी ,डॉक्टर साहब ,ऐसी कोई ,’बात नहीं ‘डॉक्टर ने समझाया ,-‘जब तक कोई मरीज़ अपनी अर्थी के साथ चलने वालों की संख्या गिनने लग जाता है ,तब दवाईओं की शक्ति आधी जाती है। ‘जीवन में आकर्षण को पैदा करो। तभी जीने की संभावना दूनी होगी। और अंत में -पुत्र -डैड ,मुझे एक शंका है। डैड ,क्या है बेटा ,बताओ। पुत्र ,-‘भगवान् श्री राम ने त्रेतायुग में अपने पिता से सुनकर ईश्वरीय शक्ति प्राप्त की थी। ‘ डैड ,-‘यह सत्य है बेटा। ‘पुत्र ,-‘सतयुग में प्रह्लाद ने अपनी पिता की बातों को नहीं सुनकर विख्यात हो गए ‘डैड -,’यह भी सत्य है। ‘पुत्र ,-तो क्या मुझे आपको सुनना चाहिए या नहीं ?’डैड ,-‘मेरे प्रिय पुत्र ,-.’हमलोग कलियुग में जी रहे हैं। हम दोनों के लिए अच्छा है कि तुम्हारी माताजी की ही सुने जिससे कि हमलोग एक शांतिपूर्ण और सरस जीवन व्यतीत कर सकें। ‘

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