ga('send', 'pageview');
Articles Hub

आखिरी खत-The last letter an emotional and real story of writer Virginia Woolf

The last letter an emotional and real story of writer Virginia Woolf
The last letter an emotional and real story of writer Virginia Woolf,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language
अगर कोई मुझे बचा सकता है तो केवल तुम -आखिर ऐसा क्या हुआ कि उच्च कोटि की लेखिका वर्जिनिआ वूल्फ आत्महत्या करने के पूर्व जो पत्र अपने पति को लिखा, उसने दुनिआ को रुला दिया। उनकी किताब ए रूम ऑफ़ वन्स ओन पढ़ने से तो ऐसा ही लगता है। वह कहती हैं कि अगर कोई औरत उपन्यास लिखना चाहती है तो उसके पास अपना पैसा और एक कमरा जरूर होना चाहिए। इस किताब ने दुनिया भर में खलबली मचा दी कारण इसमें एक लेस्बियन औरत का जिक्र है। एक औरत क्या दूसरे औरत के प्रति सहज रूप में आकर्षित हो जाय ,ऐसा हो सकता है। लेखिका ने 28 मार्च 1941 को अपने घर के पास ही एक नदी में अपने ओवरकोट की जेब में पत्थरों से भरकर नदी में डूब गयी। उनका पार्थिव शरीर १८ अप्रैल को मिला। आत्महत्या करने से पूर्व उन्होंने एक मार्मिक पात्र अपने पति के नाम लिखा जो किसी के भी आँखों में पढ़ने के बाद आंसू ला देगी।
और भी प्रेरक कहना पढ़ना ना भूलें==>
दो प्रेरणादायक कहानियां-Two new inspirational stories in hindi language with moral
बिजली महादेव-a small story of temple of Mahadev in Himachal Pradesh
प्रेरक कहानी-two inspirational stories about teachers in hindi language
The last letter an emotional and real story of writer Virginia Woolf,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language

पात्र इस प्रकार है -‘मेरे सबसे प्रिय ,मुझे अब यह यकीं हो गया है कि मेरे ऊपर दोबारा पागलपन हावी हो रहा है और हम उस डरावने समय से नहीं गुजर सकते हैं। पर इस बार मैं इससे उबर नहीं पाऊँगी मैं एकाग्र नहीं हो पा रही हूँ और मुझे आवाजें सुनाई दे रही हैं। तुमने मुझे वह सारी खुशियां दी जो मुमकिन थी। तुम मेरे साथ हर तरह से रहे मुझे नहीं लगता कि दो व्यक्ति इस खौफनाक बीमारी के चलते साथ खुश रह सकते हैं। अब मैं और ज्यादा लड़ नहीं सकती। मैं जानती हूँ कि मैं तुम्हारी जिंदगी तबाह करने जा रही हूँ। लेकिन तुम मेरे बिना भी काम कर सकते हो और यकीकन तुम कर पावोगे। यह पत्र मैं ठीक से लिख भी नहीं पा रही हूँ। मैं पढ़ नहीं सकती ,मैं क्या कहना चाहती हूँ मेरी जिंदगी की सारी खुशियों का श्रेय तुमको देती हूँ क्योंकि तुम मेरे साथ बेहद धैर्य के साथ रहे .कोई जितना अच्छा मेरे साथ हो सकता है ,तुम मेरे साथ उतने अच्छे रहे। अगर किसी ने मुझे बचाया होता तो वो तुम ही होते. .मुझसे तो सब छूटता चला गया ,एक तुम्हारी अच्छाईओं को छोड़कर। मैं अब तुम्हारी जिंदगी खराब नहीं कर सकती। दरअसल वर्जिनिआ के पिता एक यहूदी थे और उस दौर में यहूदियों पर घनघोर अत्याचार हो रहे थे हिटलर और उसकी नाज़ी सेना के द्वारा। वह तो पहले से डिप्रेशन में थी वह इन सब को झेल नहीं पाई। और अपनी जिंदगी को ख़त्म कर लिया। उन्होंने कहा था कि बाहर से कोई दरवाज़ा बंद कर दे तो कितनी अप्रिय स्थिति है लेकिन उससे भी अप्रिय वो है जब दरवाज़ा अंदर से बंद हो। यह आज तक रहस्य ही है कि एक सफल राइटर होकर भी वह अपना सुसाइड नोट्स भी ठीक से नहीं लिख पाई।
मैं आशा करता हूँ की आपको ये story आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्। ऐसी ही और कहानियों के लिए देसिकहानियाँ वेबसाइट पर घंटी का चिन्ह दबा कर सब्सक्राइब करें।

Tags-The last letter an emotional and real story of writer Virginia Woolf,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language

80%
Awesome
  • Design
loading...
You might also like