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जीवन की सच्चाई-The Truth of life new short motivational story in hindi language of king chitrasen

The Truth of life new short motivational story in hindi language of king chitrasen
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राजा चित्रसेन लम्बे राज़ कार्य से ऊब चुके थे सो वे शिकार पर प्रस्थान करने हेतु उतावले हो चुके थे. प्रातः काल होते ही अपना रथ और तीर -कमान लेकर जंगल की तरफ शिकार पर निकल पड़े। बहुत भटकाव के बाद उन्हें एक हिरन का बच्चा नज़र आया। उन्होंने अपना रथ उसी तरफ मोड़ दिया पर हिरण का बच्चा बहुत फुर्तीला था सो वह ना जाने कहाँ कुलांचे भरते हुए जंगल में ओझल हो चुका था। महाराज उसे खोजते -खोजते बहुत दूर जा चुके थे। अचानक उन्हें हिरण का शावक एक पहाड़ी पर दिखाई दिया। वे रथ सहित पहाड़ी पर चढ़ने लगे। दुर्भाग्यवश घोड़ों के गलत दिशा में दौड़ लगाने के कारण रथ का संतुलन बिगड़ गया और रथ का एक पहिया निकल गया। महाराज नीचे लुढ़कते हुए बहती नदी में गिर पड़े। जब महाराज को होश आया तब तो उन्होंने अपने आप को नदी के किनारे पाया। और वह हिरण का शावक उन्हें चाट रहा था। जब वे उठे तब वह शावक जंगल की तरफ इशारा करते हुए दौड़ने लगा। थोड़ी देर बाद वह एक कुटिया के पीछे छुप गया। महाराज को वहाँ एक बूढ़े से भेंट हुयी उन्होंने उस बूढ़े से पूछा -क्या मैं आपकी कुटिया में कुछ समय व्यतीत कर सकता हूँ ?
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बूढ़े ने हामी भरी। और कहा कि तुम जितना समय चाहो यहां व्यतीत कर सकते हो। राजा ने उस बूढ़े से पूछा ,-‘बाबा आपकी क्या उम्र होगी ?बूढ़े ने जवाब दिया 10 बर्ष। राजा ने आश्चर्य होकर कहा -लेकिन आपको देखकर तो लगता है कि आप शतायु भी पार कर चुके हैं। वो मेरे शरीर की आयु हो सकती है बेटा ,जिसमे मैंने निरर्थक कार्य किये हैं। मरी सार्थक आयु तो महज़ 10 बर्षों की है जिसमे मैंने ईश्वर के लिए कार्य किया है। स्वार्थ के लिए जीवन का जीना बेकार है। परमार्थ के लिए जीना ही सच्चा जीवन है। राजा काफी थका हुआ था इसलिए वह जल्दी ही सो गया। सपने में उसने देखा वही बूढ़ा व्यक्ति उनसे कह रहा है कि ,’हे राजन ,ये जंगल ,नदियाँ पहाड़ पशु -पक्षी सब आप ही के धरोहर हैं फिर क्यों अपना अमूल्य समय नष्ट कर इन्हे मिटा रहे हो राजा की नींद खुल गयी। जब आँखे खुली तो ना तो कुटिया थी और ना ही वह बूढ़ा बाबा सब माया थी। केवल राजा को जीवन की सार्थकता समझाने के लिए।

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