ga('send', 'pageview');
Articles Hub

पुनर्जन्म-three motivational stories with a motivational poem of gulzaar

three motivational stories with a motivational poem of gulzaar,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language
पुनर्जन्म -भ्रम या सच ?-पुनर्जन्म से जुडी घटनाएं हमेशा से विवाद का विषय रहा है। विश्वास और अविश्वास ,सभी के अपने -अपने तर्क हैं। मान्यता अनुसार मनुष्य का शरीर मरता है पर आत्मा नहीं। आत्मा एक शरीर को त्यागता है तो दूसरे शरीर में प्रवेश करता है। ,इसे ही पुनर्जन्म कहते हैं। गीता प्रेस ,गोरखपुर की एक किताब ,’परलोक एवं पुनर्जन्मांक ‘में ऐसी ही घटनाओं का वर्णन है। बर्ष १९६० में प्रवीणचन्द्र शाह के यहां पुत्री का जन्म हुआ। जिसका नाम राजुल रखा गया। वह पिछले जन्म की बातें बताने लगी। दादाजी ने उसकी बातों की जांच -पड़ताल की जुनागसढ़ के गोकुलदास ठक्कर की बेटी गीता की मृत्यु अक्टूबर १९५९ में हुई थी। जब वह ढाई साल की थी। राजुल ने अपने पूर्वजन्म के माता -पिता एवं अन्य रिश्तेदारों को पहचान लिया। उसने अपना घर ,और वह मंदिर भी पहचान लिया जहां वह अपनी माँ के साथ पूजा करने जाती थी।

। [२] यह घटना अमेरिका की है। एक महिला जिसका नाम रोजनबर्ग था ,बार -बार एक शब्द जैन बोला करती थी। जिसका अर्थ ना तो वह स्वयं जानती थी ना ही उसके आस-पास रहने वाले लोग। वह आग से बहुत भयभीत रहती थी। एक बार जब वह जैन धर्म से सम्बंधित गोष्ठी में शिरकत कर रही थी ,तभी उसे अपने पूर्व जन्म की बातें याद आने लगी। वह भारत के एक जैन मंदिर में रहा करती थी। और आग लग जाने के कारण उसकी आकस्मिक मृत्यु हुए थी।
और भी प्रेरक कहना पढ़ना ना भूलें==>
ईश्वर का न्याय
अनसुलझे रहस्य
एक क्रांतिकारी खोज
three motivational stories with a motivational poem of gulzaar,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language

[३] बर्ष १९६३ में श्रीलंका के बाटा पोला गांव रूबी कुसुमा का जन्म हुआ था। उसके पिता का नाम सीमन सिल्वा था। रूबी ने बताया कि वह पिछले जन्म में एक लड़का थी। उसका घर वहाँ से चार मील दूर अलूथवाला गांव में है। उसका घर बहुत बड़ा है। पूर्वजन्म में उसकी मृत्यु कुवें में डूबने की वजह से हुई। उस गांव में करउनसेना नाम का लड़का सन १९५६ में मरा था। और लड़की द्वारा बताई गई सारी बातें सच निकली।

अंत में गुलज़ार साहब की चंद खूबसूरत पंक्तियाँ —
पाने को कुछ नहीं ,ले जाने को कुछ नहीं
फिर भी क्यों चिंता करते हो
इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी
ये जिंदगी है यारों
पल-पल घटेगी।
बार-बार रफू करता हूँ
जिंदगी की जेब
कमबख्त फिर भी निकल जतें है
खुशियों के कुछ लम्हे
जिंदगी का सारा झगड़ा ही
ख्वाहिशों का है
ना तो किसी को गम चाहिए
ना ही किसी को कम चाहिए। बोली बता देती है
इंसान कैसा है
बहस बता देती है ,ज्ञान कैसा है
घमंड बता देता है,कितना पैसा है
संस्कार बता देते है ,परिवार कैसा है।
ना राज है
‘जिंदगी ‘ना नाराज़ है जिंदगी
बस जो है ,वो आज है ,जिंदगी। ‘

मैं आशा करता हूँ की आपको ये story आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्। ऐसी ही और कहानियों के लिए देसिकहानियाँ वेबसाइट पर घंटी का चिन्ह दबा कर सब्सक्राइब करें।

Tags-three motivational stories with a motivational poem of gulzaar,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language

80%
Awesome
  • Design
loading...
You might also like