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ज्ञानी बालक और राजा-three new hindi inspirational short stories for young audiance

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1.
(ज्ञानी बालक और राजा)

बहुत समय पहले की बात है की एक राजा एक घने जंगल में शिकार कर रहा था तभी अचानक तेजी से बारिश होने लगी और हवा भी बहुत तेज से चलने लगी. जब कुछ देर बाद बारिश बंद हो गयी तो राजा ने देखा की कोई भी सैनिक उसके साथ नहीं है और वह उनसे बिछड़ गया था. घने जंगल में पैदल चलने के कारण राजा को बहुत तेज भूख और प्यास लग गयी थी. वह बहुत ही परेशान हो गया था तभी तीन लड़के आते दिखाई दिए उसको , उसने उनको बुलाया और बोला मुझको बहुत तेज भूख और प्यास लगी है , क्या यहाँ मुझको खाना और पानी मिलेगा. लड़को ने कहा – क्यों नहीं जरूर मिलेगा , वे भाग कर अपने घर गए और राजा के लिए पानी और खाना लेकर आ गए.
खाना खाने के बाद राजा ने बताया की वह एक राजा है और तुम लोगो से बहुत खुश है तुमको तो मांगना है मांग लो.
पहले लड़के ने बोला – मुझको ढेर सारा धन चाहिए ताकि में सही से रह सकू.
राजा ने बोला में तुम को धन दे दूंगा.
फिर दूसरे लड़के ने बोला – मुझको तो घोडा और बंगला चाहिए.
राजा ने बोला – तुमको भी मिल जायेगा.
फिर तीसरे लड़के ने बोला – महराज मुझको तो ज्ञान चाहिए और कुछ नहीं. राजा ने उस लड़के के लिए एक टीचर कर दिया और वह लड़का पढ़ लिखकर राजा के यहाँ ही मंत्री बन गया.
काफी समय बाद राजा को अपनी पुरानी जंगल वाली बात याद आयी तो राजा ने उन दो लड़को से भी मिलना चाहा. रात को राजा ने सबको डिनर पर बुलाया और सबसे पूछा कैसे हो तो पहले वाले ने बोला – में तो कंगाल हो गया हु , सारा पैसा ख़त्म हो गया है. फिर राजा ने दूसरे वाले लड़के से पूछा – उसने भी बोला मेरा तो कुछ धन चोरी हो गया और बहुत ही काम बचा है जो ख़तम हो जायेगा . फिर राजा ने अपने मंत्री यानी तीसरे लड़के से पूछा – वह बोला महराज मैंने तो आप से ज्ञान माँगा था मेरा तो ज्ञान दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है अपने दोस्त की यह बात सुनकर उन दो लड़को को बहुत ही अफ़सोस हुआ.
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2.

(साधु का क्रोध और प्यार )

एक साधु बहुत देर तक गालियां बकता रहा. जब गालियां बकते -बकते थक गया तो अपने कुटिया के भीतर चला गया. अगले दिन फिर सुबह वही सिलसिला , लोग हैरान रहते की यह कैसा साधु है जो की भगवान् के भजन के बजाय गालियो के प्रवचन करता है . उसकी कुटिया से थोड़ी ही दूर पर एक और कुटिया बनी हुई थी , उसमें एक महात्मा रहते थे. पता चला की वह साधु उन्ही पर गलीयो की बारिश करता था.
वे महात्मा अपने ध्यान में लीन रहते थे और गालियां सुनकर भी क्रोधीत नहीं होते थे
एक दिन सुबह एक युवा साधक आया , उस साधु के पास गया और उनको एक फलो की टोकरी देने लगा . साधु ने साधक से फल देने वाले का विवरण पूछा. विवरण सुनते ही वह साधु फिर से गालियां देना स्टार्ट कर दिया . यह सुनकर वह साधक वापस चला गया
कुछ देर बाद वह साधक फिर वापस आया और बोला महाराज उन्होंने – बोला है की आप रोजाना जो अमृतवाणी करके अपनी शक्ति बर्बाद करते है ,उसको बनाये रखने के लिए खाना बहुत ही जरूरी है.
वह साधु रोस से बोला उन्होंने मेरे लिए यह बोला है , में अमृत बर्षा नहीं , गलियो की बर्षा करता हु उन पर यह फल वो मेरे लिए तो भेज ही नहीं सकते , तुम को कोई भ्रम हो गया होगा
युवा साधक यह सुकर बोला – महाराज यह फल उन्होंने ने ही आप के लिए भेजा है. आप महर्षि दयानंद सरस्वती के स्व्भाव से परिचित नहीं है , वे क्रोध का बदला प्यार से लेते है. इसलिए आप इसको सवीकार करे.
वह साधु यह सुनकर दंग रह गया और बोला जिस महर्षि दयानंद के नींदा को में अपना धर्म मानता था वो इतना छमाशील है. यह कहते वह दूसरे कुटिया में गया और महर्षि दयानंद के पैरो में लेट गया और उनसे माफी मांगने लगा.

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3.

(नदी और दो दोस्तों का संघर्ष )
रोहित और कमल बहुत ही अच्छे दोस्त थे । दोनों हमेसा साथ रहते थे और जो भी करना होता था साथ में ही करते थे , एक दिन की बात है दोनों अपने गांव में बैठ कर कुछ करने के लिए सोच रहे थे की तभी राइट ने कहा कमल चलो शहर की वोर चलते है वही पर चलकर कुछ करते है । फिर क्या था दोनों ने अपने सारे सामान पैक कर लिया और शहर की तरफ चलने लगे । लेकिन रास्ते में एक नदी थी जो की पार करने के बाद आती थी , ठण्ड का मौसम था नदी का पानी बर्फ की तरह हो रहा था । पहले तो दोनों दर से गए , लेकिन थोड़ी देर बाद दू ने हिमत करके आगे बड़े तभी रोहित का पैर फिसल गया और वह गिर गया और वह वापस आ गया । लेकिन काम चलता गया और थोड़ी देर बाद उसका पैर भी फिसल गया , लेकिन कमल रुका नहीं और चलता ही चला गया । रोहित उसको बुलाने लगा और बोला कमल वापस आ जा नहीं तो वही मर जायेगा ।
कमल बहुत ही हीमत वाला था रुका नहीं , लेकिन कुछ दूर चलने के बाद फिर गिर गया । रोहित फिर बोलने लगा कमल वापस आ जा , लेकिन कमल माना नहीं और कई बार गिरन के बाद वह नदी के दूसरे किनारे पर पहुंच गया । इसके बाद कमल ने रोहित को भी बोला अब तू भी आ जा जैसे में आया हूँ , लेकिन रोहित की हिम्मत नहीं हो रही थी और बोला मैं नहीं आऊंगा अब तुम अकेले ही जावो । मैं अभी यही खुश हूँ और फिर दो दोस्त अलग – अलग रास्ते पर चल दिए ।
समय बीतता गया और एक दिन कमल अपनी मेहनत से बहुत ही बड़ा आदमी बन गया और रोगित आज भी उसकी गांव में अपनी जिंदगी गुजार रहा है और वह अब बहुत ही पछताता है की काश कमल के साथ मैं भी चला गया होता तो आज मैं भी कुछ काम लायक बन गया होता ।
अक्सर हमारी लाइफ में भी ऐसा होता है की है हम लोग बहुत सारे काम नहीं कर पाते है और दर के मारे पीछे आ जाते है , लेकिन वही सफल होता है जो लाइफ में बड़ा रिस्क ले लेता है । इस कहानी से हम लोगो को यही सीख मिलता है की हम लोगो को कभी भी हार नहीं मानना चाहिए जबतक हम अपने मकसद में सफल न हो जाये ।

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