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आकर्षण-true love story in hindi in short of 2019

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कॉल आये हुए आज पुरे 2 दिन हो गए. ऐसा तो कभी नहीं होता , ऐसा कौन सा काम आ गया की इतना बिजी हो गई . कॉल करने का टाइम नहीं है तो receive तो कर सकती है नहीं तो एक message भी कर सकती है की busy हूँ .जब मेरी कोई परवाह ही नहीं तो फिर प्यार कैसा? कैसे हूँ कैसे नहीं 2 दिन में एक बार भी नहीं सोची होगी . कोई फिकर ही नहीं है मेरी. और एक मैं हूँ जो दिन रात यही सोचता हूँ कैसी होगी , कहाँ होगी. ठीक तो हैं न . मैं उन सब की तरह क्यों नहीं हो जाता जो अपने आप में ही मस्त रहते है. किसी से भी मतलब नहीं .
भगवन मुझे भी ऐसा ही बनाते. अपने आप बोलते हुए हरीश कमरे में इस तरफ से उस तरफ घूम रहा था. चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी. पास के table पर पड़े mobile को ऐसे घुर रहा था जैसे अभी उस से कुछ निकलने वाला हैं मगर अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ. ना ही mobile का बेल बजा ना ही बेचैनी शांत हो रही.
रिया और हरीश के father friend हैं. हरीश का कभी कभार रिया के यहाँ जाना होता या फिर रिया function में हरीश के यहाँ आती रहती थी. हरीश देखने में सुंदर किसी model के जैसा था. गोरा रंग बड़ी बड़ी आखें बॉडी भी किसी फिल्मी हीरो से कम नही था. धीरे धीरे इन में दोस्ती और फिर प्यार हो गया. अछे दिन बहुत ही जल्दी निकल जाते हैं और बुरे दिन काटे नहीं कटते . रिलेशन के कब ३ साल बित गए पता ही नहीं चला. एक दुसरे से मिलना, बाते करना कब दिन निकल जाते थे पता ही नही चलता कितना भी मिल लो मन ही नही भरता और उल्टा ज्यादा मन करने लगता हैं . एक दुसरे के लिए कसमे वादे ये सिलसिला चलता रहा. इसी दौरान रिया के स्वभाव में chang आने शुरू हो गए. call नही उठाना, call काट देना.
अचानक mobile का रिंग बजा. हरीश उस पर ऐसा झपटा जैसे एक बाज अपने शिकार पर झपटा मरता हैं. चेहरे पर मुस्कान आ गई शायद रिया call की होगी. शायद क्या उसी ने किया होगा. मेरे बिना तो रह ही नहीं सकती हैं. मैं बेचैन हूँ तो वो भी होगी. ऐसा नही है की मैं केवल मैं ही हूँ. 2 सेकंड में कितनी बातें घुमने लगी दिमाग में. जितना गुस्सा था ख़त्म हो गया. चेहरे पर मुस्कान की तरंगे दौड पड़ी.
“हेल्लो” हरीश ने call receive करते हुए बोला.
“तू कब से call क्यों नहीं receive कर रहा था. कब से रिंग रो रहा है. कहा था तू?” उधर से कोई बोला .
“कौन बोल रहा हैं.” सारी मुस्कान उसी रस्ते से वापस हो ली जिस रास्ते से आई थी. किसी लड़के की आवाज सुन कर जो energy के साथ हेल्लो बोला था वो वही ख़त्म हो गई
“अबे मैं रवि बोल रहा हूँ. क्यों आवाज समझ में नहीं आ रहा हैं तुझे. इतने दिनों से खलने क्यों नहीं आ रहा हैं. आजा ground में”
एक बार तो उसके दिल में आया बोल दे तुमको call करने के अलावा और कोई काम नहीं है और call करना है तो unknown number से क्यों करते हो. मगर दिल काबू में करते हुए धीरे से ही बोला “आता हूँ कुछ देर में” कहते हुए call काट दिया.
“हाँ क्या बात हैं तू इतना उदास क्यों हैं” ground में पहुचते ही रवि में सवाल दागा.
“कुछ नहीं यार मन नहीं लग रहा हैं” हरीश भी उसके पास जाकर बैठ गया.
“कुछ तो बात हैं. बता न क्या हुआ”
“3-4 दिन से रिया का call नहीं आ रहा हैं. न तो call receive कर रही हैं और ना ही call कर रही हैं. कोई message भी नहीं की.” दिल के दर्द को खोल कर रख दिया.
“मैं भी उसे आज कल नहीं देखा रहा हूँ. चल आजा उसके घर के तरफ चलते हैं.”
“”यार तू उसके लिए इतना बेचैन रहता हैं वह भी तेरे लिए बेचैन रहती है.” बाइक चलते हुए रवि ने पूछा.
“उसका तो पता नहीं मगर मुझे मन ही नहीं लगता हैं उस से बाते किये बिना. ऐसा लगता है जैसे कुछ खोया है. बार बार अपना mobile चेक करता हूँ शायद कुछ आया हो उसका.” हरीश बोलते हुए रोड के चारो तरफ देख भी रहा था शायद कही दिख जाये.
“उसका छत तो खाली हैं.” हरीश ने उसके घर के तरफ देखते हुए बोला.
“मुझे लग रहा हैं वो घर पर हैं नहीं. कही गई है.” रवि ने अपनी राय दी.
“एक बात बोलू, बुरा तो नहीं मानेगा” वापस ground में आने के बाद रवि बोला.
“बोल” धीरे से उदास मन से बोला.
“मुझे लगता हैं. की रिलेशनशिप को लाकर बस तू ही serious हैं रिया नहीं रिया तुमसे बस आकर्षित थी, love नहीं था. और love और अट्रैक्शन में बड़ा फर्क हैं. love में फिलिंग होता हैं, एहसास होता हैं. और वही अट्रैक्शन में फिलिंग होता ही नहीं हैं.जब तक कोई अच्छा लगता है तब तक ही वो उसको अच्छा लगता हैं जैसे ही कोई और तुमसे अछ्छा लगता हैं पहले वाले से अट्रैक्शन खत्म हो जाता हैं. और love में ऐसा होता ही नहीं है वो तो कभी खत्म ही नहीं होता. चाहे कुछ भी हो जाये , कैसी भी condition आ जाये.”
“आखिर क्या करू कुछ समझ में नहीं आ रहा है. मेरी कमजोरी है वो. वो जैसे कहती हैं मैं वैसा ही करता हूँ. फिर भी पता नहीं क्यों ऐसे बेहव करती है. तू ही बता क्या करू मैं.”
“आराम से बैठ कर इस बात को समझ की ऐसे कब तक चलेगा. नहीं तो उस से बढ़िया से बात कर इस बारे में की वो ऐसा क्यों कर रही हैं क्या मन में है उसके.”
इसके बाद न तो रवि कुछ बोला और न हरीश ने. हरीश के परेशान मन में और परेशानी बढ़ गया. एक तरफ तो रिया का बेहव से परेशान था दूसरी तरफ उसे छोड़ना भी नहीं चाह रहा था. उसे रवि की भी बाते सही लग रही थी की तू ही relationship को लेकर serious हैं वो नही. ये भी तो सच हो सकता हैं की उसका मेरे तरफ अट्रैक्शन भर ही था love था ही नही.
आज 6 दिन बित गये. ना ही रिया का call आया ना ही message और ना ही हरीश की बेचैनी कम हुई. गुस्सा उसके स्वभाव में आ गया. किसी से भी झगड़ा करने लगा. जो कभी अपने पापा के पास खड़ा नही होता था वो हरीश उनके बातो का जवाब देने लगा.उसे खुद समझ नहीं आ रहा था मैं क्या कर रहा हूँ. ऐसा क्यों कर रहा हूँ. सही बोल रहा था रवि बैठ कर बात ही करते है आखिर चाहती क्या हैं. तिल-तिल मरने से अच्छा हैं एक बार में मर जाना.
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क्या ये प्यार है
एक सच्चे प्यार की कहानी
कुछ इस कदर दिल की कशिश
प्यार में सब कुछ जायज है.
“नमस्ते आंटी! रिया घर पर हैं क्या?” हरीश रिया के घर में घुसते ही पूछा.
‘हाँ बेटा, अपने कमरे में हैं . आज ही आई हैं इसलिए शायद सोई हैं.” रिया के मम्मी ने जवाब दिया.
“कहाँ गई थी?” हरीश ने ऐसा मुह बनाया जैसे कोई सदमा लगा हो.
“अपने दोस्तों के साथ पिकनिक पर गई थी. आज 5-6 दिन बाद वापस आई हैं. कुछ बात हैं क्या बेटा?” उन्होंने पूछा
“नहीं आंटी” कहते हुए रिया के कमरे में चला गया.
‘तुम्हारे पास मैं इतना call किया message किया. तुमने एक भी जवाब क्यों नहीं दिया?” हरीश रिया के कमरे में घुसते ही बोला “call नही receive कर सकती थी तो message तो कर ही सकती थी. न तो call की न ही message की.”
“मैं वहाँ दोस्तों के साथ पिकनिक पर गई थी उसमे call करके बात करती तो सारा मज़ा खराब हो जाता” उसने बेड पर उठते हुए बोली “ अब आ गई हूँ अब बाते करेंगे.”
“अपने दोस्तों के साथ रहोगी तो मुझसे कोई मतलब नहीं. कहाँ हो कहाँ गई हो मुझे भी तो पता होना चाहिए. मैं तुमसे प्यार करता हूँ. तुम्हारे लिए कितना बेचैन था तुम समझोगी कभी?”
“प्यार अपने जगह है. ये मेरा पर्सनल लाइफ हैं मैं ऐसे चाहूँ जिउंगी. इसमें किसी को कुछ भी बोलने का कोई अधिकार नहीं हैं.ना तुमको ना ही मम्मी-पापा को. तुमको कैसे रहना है तुम देख लो.” रिया को हरीश के बातो का कोई प्रभाव नही हुआ.
“क्या ये ही प्यार हैं?” हरीश की आँखे नाम हो गई. जिसके लिए इतना बेचैन रहा वो ही यह बात बोल रहा हैं क्या यह केवल मेरे लिए हैं या हम दोनों के लिए. “तो क्या ये रिलेशन कुछ भी नहीं है? ये प्यार कुछ भी नहीं है? सब कुछ ऐसे ही चल रहा था?’
“मैं नहीं जानती यार. मुझे सोने दो थकी हुई हूँ. तुमको जो अच्छा लगे कर लो मुझे कोई मतलब नहीं है. मैं सो रही हूँ. और हाँ जाते टाइम दरवाजा बंद कर देना.”
शून्य दिमाग से हरीश खड़ा रहा. कुछ बोलू या जाऊ यहाँ से. जिसके लिए इतना बेचैन रहा न ठीक से खाना खाया न ठीक से सोया.हर समय जिसको याद किये उसने ही ऐसा बोला. जो अच्छा लगे कर लो मुझे कोई मतलब नही है. सही बोल रहा था रवि love फिलिंग और एहसास ही है.
धीरे-धीरे बहार आते हुए हरीश गम्भीर मगर आत्मविश्वास से भरा दिख रहा था.
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