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true love story in hindi language-प्यार की खोज






देसिकहानियाँ में हम एक से बढ़कर एक प्रेम  कहानियां प्रकाशित करते हैं। पेश है इसी कड़ी में “प्यार की खोज” true love story in hindi language आशा है,ये आपको पसंद आएगी।


लेखक- आदित्य
स्वेता पढ़ने में बहुत तेज थी उसे डॉक्टर बनाना था, क्योंकि उसकी माँ एक हॉस्पिटल में नर्स थी और उसके पापा नहीं थे, बचपन से ही उसने गरीबी देखी थी,लेकिन उसे इसका गम नहीं था, वो बहुत मेहनत करती थी ,और इसी मेहनत की वजह से वो हमेशा क्लास में अव्वल आती थी, उसका एक ही मकसद था, वो बहुत अच्छी डॉक्टर बने और समाज की सेवा करे,क्योंकि उसकी माँ भी तो यही करती थी,लेकिन नर्स होने की वजह से उसे बहुत पैसा नहीं मिलता था, धीरे-धीरे स्वेता बड़ी हो गयी और उसने मेडिकल का परीक्षा दिया, जिसमे वो अव्वल आयी,लेकिन पढ़ाई पूरी करने के लिए कॉलेज में एडमिशन लेना होगा,और इसके लिए पैसो की जरुरत थी,लेकिन इतने पैसे स्वेता के पास कैसे आएँगी,ये सोच रही थी,उसकी माँ भी परेशान थी,उसने बहुत कोशिश की लेकिन उसे पैसे नहीं मिले,अंत में उन्होंने अपने हॉस्पिटल के मालिक वर्मा जी जो एक डॉक्टर भी थे, उनसे बात की,वर्मा जी स्वेता को जानते थे,उन्हें मालूम था की स्वेता बहुत अच्छी लड़की है और पढ़ने में भी तेज है, इसलिए उन्होंने स्वेता का एडमिशन मेडिकल कॉलेज में करवा दिया, जिस कॉलेज में स्वेता का एडमिशन हुआ,उसी कॉलेज में वर्मा जी ने अपने बेटे संजीव का भी एडमिशन करवाया था,दोनों एक साथ ही पढ़ रहे थे,पढ़ाई के दौरान ही वो दोनों करीब आ गए, कोर्स खतम होने के बाद दोनों डॉक्टर बन गए, अब तक तो दोनों एक दूसरे से प्यार भी करने लगे थे,उनके प्यार से वर्मा जी को कोई समस्या नहीं थी, क्योंकि उन्हें मालूम था की स्वेता बहुत अच्छी और समझदार डॉक्टर है,लेकिन वर्मा जी की पत्नी को स्वेता पसंद नहीं थी,क्योंकि वो उनके स्टेटस के बराबर नहीं थी,इसलिए वो स्वेता को अपनी बहु नहीं बनाना चाहती थी,उनकी नजर शर्मा जी की बेटी स्वीटी पर थी, शर्मा जी की बेटी भी स्वेता और संजीव के साथ ही उसी कॉलेज में पढ़ रही थी.स्वीटी के पापा भी डॉक्टर थे जो काफी अमीर थे,इसलिए वर्मा जी पत्नी स्वीटी को अपना बहु बनाना चाहती थी, स्वीटी भी संजीव को पसंद करती थी,जब उसने जाना की संजीव की माँ उसे पसंद करती है तो वो संजीव से प्यार करने लगी, अब तो अजीब हालत हो गयी थी,संजीव और स्वेता एक दूसरे से प्यार करते थे,जबकि स्वीटी भी संजीव से प्यार करती थी, वर्मा जी स्वेता को अपनी बहु बनाना चाहते थे,जबकि वर्मा जी की पत्नी स्वीटी को अपना बहु बनाना चाहती थी, वक्त के साथ साथ संजीव और स्वेता बहुत करीब हो गए थे, लेकिन वक्त को कुछ और ही मंजूर था,क्योंकि वर्मा जी पत्नी और स्वीटी स्वेता को संजीव की जिंदगी से निकलने में लगे हुए थे,और मौका की तलाश कर रह थे उन्हें एक दिन मौका मिल भी गया,जब एक ब्रेन ट्यूमर का मरीज वर्मा जी के हॉस्पिटल में एडमिट हुआ और उसका ऑपरेशन स्वेता और वर्मा जी ने मिल कर किया,मरीज का ऑपरेशन तो सही से हुआ लेकिन वर्मा जी ने मरीज की साडी जिम्मेदारी स्वेता को दे दी, और इस मौका का फैयदा स्वीटी ने उठाया,उसने स्वेता को धोखा से बाहर बुलवाया को मरीज को जान से मार दिया।
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लेकिन इसका वीडियो रिकॉर्डिंग वहां का एक स्टाफ कर लिया, मरीज की हत्या का आरोप स्वेता पर लग गया,उसने बहुत हाथ और पैर जोड़े लेकिन उसकी बात कोई नहीं माना,जिसकी वजह से स्वेता को जेल हो गयी उसका डॉटर का डिग्री भी ले लिया गया, संजीव ने भी उस पर विश्वास नहीं किया, इधर वर्मा जी की पत्नी ने संजीव की शादी स्वीटी से करवा दिया.इधर वो स्टाफ स्वीटी को ब्लैकमेल करने लगा, स्वीटी भी पैसा दे दे कर उसका मुँह बंद कर रही थी,यूँ ही समय बीतता चला गया काफी साल के बाद एक दिन उस स्टाफ की पत्नी बीमार पड़ गयी, वो बहुत परेशां हुआ उसने बहुत इलाज करवाया लेकिन वो ठीक नहीं हो रही थी,फिर उसने अपने ही हॉस्पिटल में दिखवाया,जहाँ वो काम करता था, वहां वर्मा जी ने बताया की उसकी पत्नी को ब्रेन ट्यूमर है,और उसके पास समय कम है,अचानक से उसे उस मरीज का ध्यान आ गया,जिसे यही बीमारी थी,और जिसे स्वीटी ने मारा था और स्वेता को सजा हुई थी,उसे लगा की उस बात की सजा भगवन उसे दे रहा है, इसलिए उसने वो वीडियो वर्मा जी और संजीव को दिखा दी, उसके बाद तो संजीव को स्वीटी से नफरत हो गया और उसे सजा सुनाई गयी वर्मा जी स्वेता का पता लगाए,वो एक स्कूल में पढ़ाने का काम कर रही थी उसे वापस हॉस्पिटल लाया गया जहाँ उसने एक बार फिर स्टाफ की पत्नी का इलाज किया और वो ठीक हो गयी,वर्मा जी ने स्वेता को फिर से हॉस्पिटल में काम करने के लिए रख लिया और उसे बताया की वो उसके घर भी आ जाये संजीव से शादी कर ले, लेकिन स्वेता नहीं मानी उसने कहा वो हॉस्पिटल में काम करेगी लेकिन संजीव से शादी नहीं करेगी,क्योंकि उसे विश्वास था की भले की कोई नहीं मने लेकिन संजीव तो उससे सच्चा प्यार करता था,फिर वो क्यों नहीं माना,अगर विश्वास नहीं तो रिश्ता नहीं,इसलिए वो शादी नहीं करेगी।
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