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भाग्य अपना-Two motivational stories in hindi language about own luck

अपना -एक किसान था जिसके पास एक बकरा और एक जोडा बैल थे। दोनों बैलों से वह खेतों में काम लेता था। खेतों की जुताई में कड़ी मिहनत। इधर बकरे के लिए कोई काम नहीं था। दिनभर इधर -उधर घूमकर हरी -हरी घास खाता और खा -पीकर मोटा -तगड़ा हो गया था। बैल उसे देखते तो दुखी हो जाते। देखो इसका भाग्य ,दिनभर खा -खा कर मोटा -तगड़ा हो गया है। बस इसके तो मज़े ही मज़े हैं। मालिक ऐसे हैं कि सिर्फ हमलोगों से ही दिनभर काम लेते रहते हैं सारा दिन हल में जुटा रहना पड़ता है। एक दिन की बात है ,दोनों बैल खेत में जुताई कर रहे थे। और बकरा मज़े में घास चर रहा था। दोनों बैल हाँफ रहे थे। यह देखकर बकरा बोला -तुम दोनों की हालत देखकर मुझे बहुत दुःख होता है। परन्तु क्या किया जा सकता है ,सब भाग्य का खेल है। मैं तो दिनभर मज़े लेकर चरता रहता हूँ। किसान की पत्नी -हरी घास लाकर मुझे खिलाती है। तुम दोनों को तो जरूर मुझसे ईर्ष्या होती होगी ?दोनों बैलों ने चुप ही रहना बेहतर समझा। शाम को जब दोनों बैल खेत से लौटे तो देखा कि किसान की पत्नी किसी कॅशे से धन लेकर उसे वह बकरा बेच रही थी। यह देखकर बैलों की आँखों में आंसू आ। गए एक बैल ने कहा-है ,तुम्हारे भाग्य में यही लिखा था।

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[२] समाधान -महात्मा बुद्ध शिष्य आनंद के साथ कहीं जा रहे थे। गर्मी का महीना था ,थोड़ी दूर चलने के बाद विश्राम के लिए एक पेड़ के नीचे रुके।आनंद प्यास बुझाने हेतु पास के झरने से पानी लाने गए। किन्तु वहाँ पशुओं की भाग -दौड़ से पानी कीचड़मय हो चुका था। गंदा पानी देखकर आनंद बिना पानी लिए ही वापस आ गए। उन्होंने बुद्ध से कहा ,-झरने का पानी निर्मल नहीं है। मई नदी से पानी ले आता हूँ। नदी काफी दूर था इसलिए पुनः आनंद को झरने से ही पानी लाने को कहा। पानी अब भी गंदा था इसलिए आनंद दूसरी बार भी बिना पानी लिए ही लौट गए। लेकिन बुद्ध ने तीसरी बार भी उसी झरने से पानी लाने हेतु भेजा। तीसरी बार जब आनंद झरने के पास गए तो पानी निर्मल पाया. कीचड नीचे बैठ गया था.इस बार आनंद स्वच्छ पानी लेकर लौटे। महात्मा बुद्ध ने कहा -‘यही स्थिति हमारे मन की है। जीवन की अनवरत भागम भाग हमारे मन को मथ देती है। लेकिन इस समय अगर कोई शान्ति और धैर्य से बैठकर इंतज़ार करे तो मन की बिक्षुब्धता कीचड की भाँति अपने आप बैठ जाती है। निर्मलता का स्वतः आगमन हो जाता है। अतः अगर बुरा समय चल रहा हो तो इंसान को अपना धीरज नहीं खोना चाहिए।

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