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डरावनी कहानी-two new hindi horror stories at single place

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आज से दो साल पहले मेरी मौसी का लडका एक एक्‍सीड़ेन्‍ट में मारा गया था। हमारे मराठी लोगों में जब किसी की मौत होती है तो उस दिन से लेकर अगले 12 दिनों तक घर में पूजा-पाठ करवाया जाता है। इसलिए इन 12 दिनों तक मैं अपनी मौसी के घर में ही था। मौसी का घर बहुत बड़ा है। मुझें और मेरे मामा के लड़के को एक सैपरेट रूम दिया गया था। हम दोनों रात में बहुत लेट सोया करते थें। तीसरे दिन के बाद हर रोज रात 3 बजे हमें हमारे कमरे के बाहर किसी के चलने की आवाज आती थी। अगले 4-5 दिनों तक ऐसा ही चलता रहा। रोज रात को किसी के चलने की आवाज आती। नौवे दिन हमने फैसला किया की हम सुबह सबसे पूछेंगे की रात को हमारे कमरे के पास कौन चलता है।
सबसे पूछा तो सबका एक ही जवाब था। ‘मैं नहीं था’। फिर दसवे दिन हर रोज की तरह रात को चलने की आवाज आना शुरू हो गई। ठीक उसी वक्‍त मेरा भाई यानी की मेरे मामा का लड़का टॉयलेट के लिए गया हुआ था और मैं कमरे में अकेला था। मैं ड़र गया उस वक्‍त लाईट भी बंद थी। हल्‍की सी लाईट एक कोने में लगी हुई थी। मैं भागने के लिए उसी वक्‍त बिस्‍तर से उठा ही था की उस वक्‍त वो चलने की एक जगह पर आकर रूक गई। तब तो मैं ओर ज्‍यादा घबरा गया और उस वक्‍त मेरी मौसी का लड़का जो 10 दिन पहले एक्‍सीड़ेन्‍ट में मर गया था वो मेरी आंखो के सामने एक कोने में खड़ा होकर मुझे देख रहा था। मैनें देखा की उसके कपड़े बुरी तरह से फटे हुए थें और वो बुरी तरह से घायल था। ठीक वैसे ही जैसे एक्‍सीड़ेन्‍ट के बाद उसकी बॉड़ी मिली थी। मैं इतना ड़र गया था की चिल्‍लाने ही वाला था की तभी उसने हल्‍के से मेरा नाम लिया। ‘साहिल’ और मैं वहीं ड़र के मारे बेहोश गया। मैने उस बारे में मामा के लड़के को भी बताया। हम दोनों उस रूम में कभी सोने नहीं गए। बारहवे दिन सुबह मेरे मामा रो रहे थे। उन्‍होंने बताया की कल रात ठीक 3 बजे उनका दरवाजा किसी ने खटखटाया। मैं हॉल में ही सोया हुआ था और हल्‍के से सेफ्टी ड़ॉर खोला और देखा की मेरी मौसी का लड़का प्रणीत आया था। मामा ने बताया था की उसे अन्‍दर कमरे में लिया और खूब सारी बातें की। ठीक 4 बजकर 3 मिनट पर वो घर से निकला और कहने लगा की अब मैं मां से मिलने जा रहा हूं। वो चला गया और मैं फिर से सो गया। 4 बजकर 5 मिनट पर मेरी आंख फिर से खुली। 2 मिनट पहले जो हो रहा था उस पर मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था। मेरी आंखे भी उस वक्‍त इतनी नींद में थी की जैसें की मैं 7-8 घंटें की नींद के बाद उठा हूं। वो सब सपना था या हकीकत मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। दोपहर मौसी ने भी बताया की प्रणीत मेरे सपने में आया था। और मुझ से बातें करके चला गया।
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2.
आज से करीब 15 साल पहले की बात है। उड़ीसा के डिस्‍ट्रीक म्‍यूरभंज में मैं और मेरी फैमिली हम लोग एक नए किराए के मकान में रहने के लिए आए थे। हम से पहले उस घर में उस घर के मालिक ही रहा करते थें। लेकिन, उनके खाली कर देने के बाद वो हमें किराए पर मिल गया था। शुरू-शुरू में तो सबकुछ ठीक-ठीक रहा। सब कुछ नॉर्मल था। लेकिन, फिर करीब 6 महीनें बाद एक दिन अचानक कुछ बहुत अजीब सा हुआ। रात में घर के सब लोग सो रहे थे। अचानक करीब आधी रात को मम्‍मी की आंख अचानक खुल गई। आंख खुलते ही मम्‍मी ने महसूस किया कि लैफ्ट हाथ पर प्रैशर पड़ रहा है। जैसे की कोई उन्‍हें खींच रहा हों। उस वक्‍त मम्‍मी आधी नींद में ही थी। लेकिन, हाथ खींचे जाने के बाद मम्‍मी की नींद बिल्‍कुल टूट गई। मम्‍मी उठी तो देखा कि बैड़ के साथ उनके पास एक आदमी खड़ा था। वो देखने में कोई बूढ़ा लग रहा था। उसने सफेद रंग की धोती पहनी थी। और वो बहुत ही लंबा था। वो बस मम्‍मी को लगातार खींचे जा रहा था। जैसे की वो उनको कहीं लेकर जाना चाहता है। लेकिन, मेरी मम्‍मी बहुत हिम्‍मत वाली इंसान है। इसलिए मम्‍मी बिल्‍कुल भी नहीं ड़री। बिना ड़रे चुपचाप सोने की कोशिश की। कुछ देर के बाद मम्‍मी को अपने आप नींद आ गई। अगले दिन सुबह मम्‍मी उठी तो यहीं सोच के कि वो जरूर कोई ड़रावना सपना था। मम्‍मी ने रात की वो बात भूलानी चाही लेकिन, जब उन्‍होंने हाथ देखा उन्‍हें अपनी आंखों पर यकींन नहीं हुआ। उनके हाथ में उंगलियों के साफ-साफ निशान थें। ओर उनका वो हाथ दर्द भी कर रहा था। मम्‍मी ने पापा को वो रात वाली बात बताई तो पापा ने कहा अब वो घर बदल लेंगे।
फिर उसके करीब 8-10 दिन बाद उस घर का मालिक हमारे घर आया। वो अपने मरे हुए पिताजी के पहली बरसी के बारें में बात कर रहा था। उसके बात सुनते ही मम्‍मी ने उनसे पूछा कि उनके पिता दिखनें में कैसे थे? तो उन्‍होंने बताया की उनके पिता बहत लंबे थें और वो धोती पहना करते थें। और हमसे ये बात छुपाई गई थी कि वो इसी घर में मरे थें। उसकी बात सुनते ही मम्‍मी को सब समझ आ गया की उस रात उन्‍होंने जो कुछ देखा था, वो कोई सपना नहीं था। बल्‍कि वो तो उस घर के मालिक का पिता था, जो एक साल पहले मर चुका था। ना जाने वो खिंच कर मम्‍मी को कहां लें जाने की कोशिश कर रहा था।
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