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एक सच्ची और निस्वार्थ प्रेमकथा-Two new hindi inspirational short stories on friendship

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1.

(एक सच्ची और निस्वार्थ प्रेमकथा)

इस कहानी की शुरुआत होती हैं शिवा नाम के एक 14 साल के बच्चे से। शिवा एक बहुत ही गरीब परिवार का बच्चा था पिता का लगभग 6 वर्ष पहले ही देहांत हो गया था। शिवा का लालन पालन उसकी माँ ने किया। एक दिन शिवा बाजार मे सब्जियाँ लेने गया था तभी उसने एक बहुत ही सुन्दर लड़की को देखा और उसे देखता ही रहा अचानक उस लड़की का ध्यान भी शिवा पर गया और वह शर्मा गयी। शिवा उस लड़की के पास जाकर उसका नाम और घर पूछा, लड़की शरमाते हुए अपना नाम “आरती “बताई और गांव के जमींदार का रिस्तेदार बताकर वहा से भाग गयी। शिवा के मन मे आरती के प्रति काफ़ी लगन भर गयी वह हमेशा उसके ही बारे मे सोचने लगा था। कुछ दिन बाद आरती अपने घर चली गयी। समय अपनी रफ़्तार से निकलता गया। शिवा अब सेना का जवान बन गया था। बॉर्डर पर लड़ाई होने वाली थी।
लड़ाई पर जाने से पहले सेना का सूबेदार रामसिंह, शिवा को अपने घर लेकर गया। सूबेदार रामसिंह के घर पहुंचते ही शिवा ने सुबेदारिन को देखा और उसकी आँखे खुली की खुली रह गयी क्युकी सुबेदारिन असल मे “आरती” ही थी जिसकी शादी रामसिंह से हो गयी थी। शिवा और आरती की आँखे भर आयी एक दूसरे से बिना कुछ बोले ही वो बहुत कुछ कह गये। अगले दिन जब सूबेदार और शिवा लड़ाई पर जाने के लिए घर से निकलने ही वाले थे तब सुबेदारिन ने शिवा के आगे हाथ जोड़कर कहा की “जंग मे मेरे पति का साथ देना और उनकी रक्षा करना क्युकी मैं उनके बच्चे की माँ बनने वाली हूँ “। हृदय को छू लेने वाली इस बात को सुनकर शिवा ने सुबेदारिन से वादा किया की” वह लड़ाई से लौटे या ना लौटे मगर सूबेदार रामसिंह जरूर वापस आएंगे। ” इतना कहकर सूबेदार और शिवा लड़ाई के लिए निकल दिए।
जंग के मैदान मे चारो तरफ से गोलिया चल रही थी शिवा को एक गोली लग चूकी थी मगर वह डटा था तभी अचानक सूबेदार के सीने मे दो और हाथ मे एक गोली लग गयी सूबेदार जमीन पर गिर गया। ये देखते ही शिवा उनके पास आया और कंधे पर उठाकर सूबेदार रामसिंह को सुरक्षित स्थान पर ले गया जहाँ से उसको अस्पताल भेज दिया गया। शिवा अगर चाहता तो सूबेदार रामसिंह के साथ जा सकता था क्युकी वह भी घायल था मगर वह सुबेदारिन से किया वादा निभा चूका था अब उसे अपने देश से किया वादा निभाना था। शिवा वापस आकर अपनी पोस्ट पर गोलिया चलाने लगा और बहुत सारे दुश्मनो को मार गिराया। जब शिवा अपनी बन्दुक मे गोलिया भर रहा था तभी एक गोली उसके सिर पर लगी और पार हो गयी। शिवा वही गिर गया और वीरगति को प्राप्त हो गया।
इस प्रकार शिवा ने अपने देश प्रेम और आरती के प्रति प्रेम को निःस्वार्थ भाव से पूरा किया।

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2.

(सच्चे दोस्त की कहानी)

बहुत पुरानी बात हैं रामनगर नामक एक गांव था। उस गांव के लोग बहुत ही गरीब थे। उसी गांव मे रामू और मोहन नाम के दो छोटे बालक भी रहते थे। रामू और मोहन बहुत ही अच्छे दोस्त थे। वे हमेशा एक साथ खेलते थे, साथ मे स्कूल जाते थे, एक दूसरे की हमेशा मदद करते थे। रामू और मोहन दोनों का पढ़ाई मे खूब मन लगता था। धीरे धीरे समय बीत रहा था। एक दिन शहर से रामू के मौसा जी रामू के घर आये। रात मे भोजन करने के बाद रामू के मौसा ने देखा की रामू एक छोटे से दीये के उजाले मे बड़े ध्यान से पढ़ रहा हैं। उन्होंने रामू से कुछ सवाल किये जिसका जवाब रामू ने बड़ी उत्सुकता से दे दिया। रामू की पढ़ाई मे लगन देख कर उसके मौसा जी ने उसको अपने साथ शहर लेकर चले आये और एक अच्छे स्कूल मे नामांकन करवा दिया। अब रामू शहर के एक अच्छे स्कूल मे पढ़ रहा था जबकि उसका दोस्त मोहन गांव के उसी छोटे स्कूल मे।
लगभग 20 साल बाद रामू अपनी सारी पढ़ाई पूरी कर के अपने गांव आया। अब रामू गांव का गरीब लड़का ना होकर एक डॉक्टर बन गया था। घर आते ही रामू दौड़ कर अपने दोस्त मोहन से मिलने गया, उसके घर पहुंचते ही रामू बहुत ही दुखी हुआ और अपने दोस्त मोहन को गले लगाकर रोने लगा। मोहन की दशा बहुत बुरी हो चुकी थी गांव मे वह बहुत ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पाया और गरीबी के कारण कम उम्र से ही मजदूरी करने लगा था। रामू से मिलकर मोहन भी बहुत ख़ुश हुआ।
रामू अब एक डॉक्टर बन चूका था अगर वह चाहता तो शहर जाकर खूब पैसा कमाता मगर उसने ऐसा नहीं किया। रामू गांव मे ही रहकर अपने दोस्त मोहन और पुरे गांव वालों की सेवा करने का मन बना लिया। रामू ने गांव के बगल मे ही एक छोटा सा अस्पताल खोल दिया और अस्पताल का सारा प्रबंधन मोहन को दे दिया। रामू और मोहन दोनों ने खूब मन लगा कर काम किया और कुछ ही सालों मे एक छोटा अस्पताल बहुत बड़ा अस्पताल बन गया। इस प्रकार से रामू ने अपने दोस्त मोहन को गरीबी से निकाला ही नहीं अपितु साथ मे समाज सेवा भी किया।

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