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भगवान आपके साथ हैं या नहीं-Two new hindi religious hindi stories of bhagwan Vishnu

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1.
(भगवान आपके साथ हैं या नहीं)

कहते है भगवान हर जगह है बस देखना का नजरिया होना चाहिए हमारा भारत देश में कई भगवान को पूजा जाता है आज हम आपके लिए एक भक्त और भगवान एक अनोखी कहानी लेकर आए है जिसे सुनने के बाद आपकी भगवान के प्रति भगती कई ज्यदा बढ़ जाएगी.
जन्म से पहले बच्चा भगवान से कहता है की प्रभु आप मुझे नया जन्म मत दीजिए मुझे प्रथ्वी पर बुरे लोग रहते है में वहा बिकुल भी नही जाना चाहता हुआ और यह कहकर बच्चा उदास हो कर बैठ गया.
भगवन ने स्नेहपूर्वक उसके सिर पर हाथ फेरते हैं और सृष्टि के नियम अनुसार उसको जन्म लेने का महत्व बताते है कुछ देर मना करने के बाद बच्चा मान जाता है लेकिन वह कहता है की आप को मुझ से एक वादा करना होगा.
भगवान-: बोलो पुत्र तुम क्या चाहते हो?
बच्चा -: आप वचन दीजिए जब तक में प्रथ्वी पर रहूगा आप मेरे साथ रहोगे.
भगवान-: अवश्य ऐसा ही होगा.
बच्चा -: पर प्रर्थ्वी आप तो अदृश्य जाते है मुझे कैसे पता चलेगा की आप मेरे साथ में हो.
भगवान-: जब तुम आखे बंद करोगे तब तुम्हे मेरे पैरो के चिन्ह दिखाई देंगे उन्हें देख कर तुम समझ जाना में तुम्हारे साथ हूँ .
फिर उस बच्चे का जन्म होता है उसके बाद वह सांसारिक बातों में उलझकर भगवान से हुए वार्तालाप को भूल जाता है उसे मरते समय यह बाद आती है तो वह भगवान के वचन की पुष्टि करना चाहता है.
जब वह आखे बंद करके जीवन को याद करता तब उसे जन्म के समय से ही दो जोड़ी पैरों के निशान दिख रहे हैं लेकिन जब उसका बुरा वक़्त चलता है तब उसे कोई निशान नजर नही आता है यह सोच कर वह दुखी हो जाता है.
बच्चा कहता है की भगवन आपने वचन नही निभाया उस वक़्त अकेला छोड़ दिया जब मुझे आपकी सबसे ज्यादा जरुरत थी बच्चा मरने के बाद भगवन के पास पहुचता हैं और बोलता है की प्रभु आपने तो कहा था कि आप हर समय मेरे साथ रहेंगे.
मुसीबत के समय मुझे आपके पैरो के चिन्ह दिखाई क्यों नही दे रहे थे भगवान मुस्कुराए और बोले पुत्र जब तुम कठिन परिस्थति से गुजर रहे थे तब मेरा हृदय द्रवित हो उठा में तुम्हे अपनी गोद में उठा लिया इस वजह से तुम्हे पैरो के चिन्ह दिखाई नही दिए.
यह कहानी से हमे यही सिख मिलते है भगवान हर जगह हमारे साथ रहते है कई बार हमरी जिंदगी में बुरा समय आता है लेकिन कुछ समय बाद सब ठीक हो जाता है हमे यह सोचते हमारे साथ बुरा होने वाला लेकिन जितना सोचते है उतना बुरा नही होता है

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2.
(विष्णु भगवान की कहानी)

एक नगर में एक सेठ व सेठानी रहते थे और सेठानी रोज विष्णु भगवान की पूजा करती थी. सेठ को उसका पूजा करना बिलकुल अच्छा नहीं लगता था. इसी वजह से एक दिन सेठ ने सेठानी को घर से निकाल दिया. घर से निकलने पर वह जंगल की ओर गई तो देखा चार आदमी मिट्टी खोदने का काम कर रहे थे. उसने कहा कि मुझे नौकरी पर रख लो. उन्होंने उसे रख लिया लेकिन मिट्टी खोदने से सेठानी के हाथों में छाले पड़ गए और उसके बाल भी उड़ गए. वह आदमी कहते हैं कि बहन लगता है तुम किसी अच्छे घर की महिला हो, तुम्हें काम करने की आदत नहीं है. तुम ये काम रहने दो और हमारे घर का काम कर दिया करो.
वह चारों आदमी उसे अपने साथ घर ले गए और वह चार मुट्ठी अनाज लाते और सभी बाँटकर खा लेते. एक दिन सेठानी ने कहा कि कल से आठ मुठ्ठी अनाज लाना. अगले दिन वह आठ मुठ्ठी अनाज लाए और सेठानी पड़ोसन से आग माँग लाई. उसने भोजन बनाया, विष्णु भगवान को भोग लगाया फिर सभी को खाने को दिया. सारे भाई बोले कि बहन आज तो भोजन बहुत स्वादिष्ट बना है. सेठानी ने कहा कि भगवान का जूठा है तो स्वाद तो होगा ही.
सेठानी के जाने के बाद सेठ भूखा रहने लगा और आस-पड़ोस के सारे लोग कहने लगे कि ये तो सेठानी के भाग्य से खाता था. एक दिन सेठ अपनी सेठानी को ढूंढने चल पड़ा. उसे ढूंढते हुए वह भी उस जंगल में पहुंच गया जहाँ वह चारों आदमी मिट्टी खोद रहे थे. सेठ ने उन्हें देखा तो कहा कि भाई मुझे भी काम पर रख लो. उन आदमियों ने उसे काम पर रख लिया लेकिन मिट्टी खोदने से उसके भी हाथों में छाले पड़ गए और बाल उड़ने लगे. उसकी यह हालत देख चारों बोले कि तुम्हे काम की आदत नहीं है, तुम हमारे साथ चलो और हमारे घर में रह लो.
सेठ उन चारों आदमियों के साथ उनके घर चला गया और जाते ही उसने सेठानी को पहचान लिया लेकिन सेठानी घूँघट में थी तो सेठ को देख नही पाई. सेठानी ने सभी के लिए भोजन तैयार किया और हर रोज की भाँति विष्णु भगवान को भोग लगाया. उसने उन चारों भाईयों को भोजन परोस दिया लेकिन जैसे ही वह सेठ को भोजन देने लगी तो विष्णु भगवान ने उसका हाथ पकड़ लिया. भाई बोले कि बहन ये तुम क्या कर रही हो़? वह बोली – मैं कुछ नहीं कर रही हूँ, मेरा हाथ तो विष्णु भगवान ने पकड़ लिया है. भाई बोले – हमें भी विष्णु भगवान के दर्शन कराओ? उसने भगवान से प्रार्थना की तो विष्णु जी प्रकट हो गए, सभी ने दर्शन किए.
सेठ ने सेठानी से क्षमा माँगी और सेठानी को साथ चलने को कहा. भाईयों ने अपनी बहन को बहुत सा धन देकर विदा किया. अब सेठानी के साथ सेठ भी भगवान विष्णु की पूजा करने लगा और उनके परिणाम से उनका घर अन्न-धन से भर गया.

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