Articles Hub

साधुता-Two new inspirational stories of mahatma bhudh and swami Vivekananda ji

Two new inspirational stories of mahatma bhudh and swami Vivekananda ji

Two new inspirational stories of mahatma bhudh and swami Vivekananda ji,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language
कुरु देश की रानी बहुत ही दुस्ट प्रकृति की थी। उसे पता चला की बुद्ध उसके प्रदेश में आ रहे हैं। रानी ने अपने लोगों को आज्ञा दी कि वे उनका अनादर करें। बुद्ध के नगर में प्रवेश करते ही लोगों ने चोर,मुत्ख ,गधा आदि अपशब्दों का सम्बोधन करना शुरू कर दिया। महात्मा बुद्ध शांतचित्त भाव से सुनते रहे। उनके प्रिये शिष्य आनंद से रहा नहीं गया। वे बोले,’भंते,हमें यहां से फ़ौरन चलना चाहिए। बुद्ध ने कहा ,कहाँ जाना चाहते हो? ‘आनंद ने कहा -किसी दूसरे नगर में जहां कोई हमें अपशब्द ना कहे। बुद्धदेव -‘अगर वहाँ भी इसी तरह कोई दुर्ब्यवहार करे तो ?’आनंद -फिर किसी और स्थान को चले जायेंगे। बुद्धदेव ने कहा -‘नहीं आनंद ,उस स्थान को तब तक नहीं छोड़ना चाहिए जब तक वहाँ शांति स्थापित ना हो जाये.संग्राम में बढ़ते हुए हाथी को देखा है,चारों तरफ से तीरों को सहता रहता है। उसी तरह हमें दुस्ट पुरुषों के अपशब्दों का सहन करना चाहिए। याद रखो आनंद ,सबसे उत्तम तो वह है जो स्वयं को वश में रखे -और कभी उत्तेजित न हॉवे।
और भी प्रेरक कहना पढ़ना ना भूलें==>
उड़ान-a new hindi inspirational story of the march month
बुद्धि एक अमूल्य धरोहर-three new motivational stories in hindi language
लवंगी-जगन्नाथ-A new hindi story from the the period of shahjhan

Two new inspirational stories of mahatma bhudh and swami Vivekananda ji,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language
[२]कर्म करो ,फल की चिंता मत करो -बर्ष १८९९ में कलकत्ते में भयंकर रूप से प्लेग फैला था। रोगियों के सेवा करनेवाले भी भयभीत होने लगे क्योंकि वे भी सेवा के दौरान बीमार पड़ने लगे। परन्तु स्वामी विवेकानंद इससे तनिक भी विचलित नहीं हुए। वे अपने शिष्यों के साथ रोगियों की सेवा करते ,साथ ही सड़कों ,नालियों की भी सफाई करते। पर समाज के कुछ धर्मभीरु लोगों को यह बर्दास्त नहीं हुआ। वे स्वामी जी से बोले -‘आप ठीक कार्य नहीं कर रहे है। विदित हो की प्रत्येक मनुष्य को अपने पापों का फल भोगना पड़ता है। ईश्वर उनके बुरे कर्मों का दंड दे रहे हैं। फिर आप उनकी सुश्रुषा कर उनके कार्यों में क्यों बाधक बन रहे है ?’स्वामीजी ने कहा -‘यह सही है की बुरे कर्म करनेवाले को ही तकलीफ झेलना पड़ता है पर अगर कोई कस्ट निवारण करने में सहयोग करता है तो क्या उसे पुण्य प्राप्त नहीं होगा ?’जिस तरह रोगियों के प्रारब्ध में दुःख पाना लिखा है उसी तरह उनके दुखों से मुक्ति दिलाकर पुण्य प्राप्त करना लिखा हुआ है। हम तो पुण्य का कार्य कर रहे है इसे ईश्वर के कार्य में बाधा कहाँ डाल रहे हैं। लोगों के पास कोई उत्तर नहीं था ,खामोश होकर वहाँ से सब खिसक लिए।

मैं आशा करता हूँ की आपको ये story आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्। ऐसी ही और कहानियों के लिए देसिकहानियाँ वेबसाइट पर घंटी का चिन्ह दबा कर सब्सक्राइब करें।

Tags-Two new inspirational stories of mahatma bhudh and swami Vivekananda ji,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language

80%
Awesome
  • Design
loading...
You might also like