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बोध कथा-Two new inspirational stories of Mahatma Budha and a wise king

Two new inspirational stories of Mahatma Budha and a wise king

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बोध कथा -एक बार भगवान् बुद्ध से उनके परम शिष्य ने पूछा –भगवन ,जब आप प्रवचन देते हैं तब श्रोता नीचे बैठते हैं और आप ऊँचे आसान पर बैठते हैं ,ऐसा क्यों?’बुद्ध बोले -‘पहले ये बताओ कि पानी झरने के ऊपर खड़े होकर पीया जाता है या नीचे जाकर ? आननद ने कहा -‘झरने के पानी ऊंचाई से गिरता है इसलिए पानी नीचे से ही पीया जा सकता है। भगवान् बुद्ध ने कहा -‘तो फिर यदि प्यासे को संतुष्ट करना है तो झरने को ऊँचे से ही बहना होगा। आनंद ने हाँ कहा। बुद्ध बोले ,’आनंद ,तुम्हे अगर किसी से कुछ पाना है तो स्वयं को नीचे लाकर ही प्राप्त कर सकते हो। और तुम्हे देने के किये डाटा को ऊपर खड़ा होना पडेगा।
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[२]समझदारी -एक समय की बात है एक प्रतापी राजा था। उसकी लोकप्रियता से पडोसी राजा उसके शत्रु हो गए थे। उन लोगों ने महल के पहरेदारों को मिला लिया और राजा को बेहोश कर अगवा कर लिया। शत्रुओं ने उस राजा को पहाड़ की गुफा में कैद कर दिया और एक विशाल पत्थर से गुफा का मुहं ढक दिया। राजा को जब होश आया तब उन्हें अंधरे गुफा में पाकर घबराहट होने लगी। उन्हें अपनी मां की कही हुई बातें याद आ गई। कुछ तो कर,यूँ ही मत मर’यह मन्त्र से राजा को जोश आ गया और उन्होंने अपनी जंजीरों को तोड़ डाला। तभी अँधेरे में एक सांप उनके एक पैर में काट लिया। राजा घबराये फिर वही मन्त्र को याद किया और उन्होंने अपनी कमर से क़तर निकाल ली और उस स्थान को चीयर दिया जहां सांप ने काटा था। अपने वस्त्र से मरहम पट्टी की। रक्त का बहना बंद हो चुका था। इतनी मुश्किलों के सामना करने के बाद वे गुफा से बाहर निकले की युक्ति सोचने लगे। हिम्मत जुताई और मां के द्वारा कहे गए मन्त्र को याद करके पुरे जोश के साथ पत्थर को धकेलना शुरूकिया। आख़िरकार पत्थर लुढ़क गया और राजा अपने महल में सकुशल पहुँच गए।

और अब थोड़ा हंस लीजिए-एक चिडियांघर में एक तोते के पिंजड़े के बाहर लिखा था-इंग्लिश l,हिंदी और भोजपुरी बोलने वाला तोता। एक आदमी ने तोते से अंग्रेजी में पूछा -‘हु आर यू ?
तोते ने कहा,आई एम ए पेरोट।
‘फिर हिंदी में पूछा,’तुम कौन हो?’
तोता’में एक तोता हूँ ‘
आदमी भोजपुरी में-तूँ के हव?
तोता,’तहार बाप सरूव एक्के बतिया चार बार पूछत हउव ,पटक के लतिया देब ‘

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