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विधाता की मर्ज़ी-two new short inspirational stories with a nice thought

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विधाता की मर्ज़ी – यह सत्य है कि विधाता के मर्ज़ी के बगैर कुछ नहीं होता पर कभी -कभी इंसानी रिश्तों में विचित्र हालात पैदा कर देते है। कथा यह है कि पांडव १२ बर्षों के लिए बनवास पर थे। यानी अज्ञातवास पर। पांडव विराटनगर के राजा के यहां सेवक बन कर रह रहे थे। उसी समय दुर्योधन ने विराटनगर पर हमले की योजना बनाई। विराटनगर के राजा उत्तर युद्ध करने के लिए चल पड़े उस समय अर्जुन किन्नर के रूप में राजकुमारी उत्तरा को नृत्य की शिक्षा दे रहे थे। उत्तर के साथी अर्जुन बने और अपनी सच्चाई बताई तथा लड़ाई में विजय हासिल की नृत्य गुरु का पिता -पुत्री के सामान सम्बन्ध होने के कारण उन्होंने उत्तरा से विवाह का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। उन्होंने अपने पुत्र अभिमन्यु से विवाह का प्रस्ताव रखऔर अभिमन्यु से उसका विवाह हुआ।
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[२]बात उस समय की है जब कारण से युधिस्ठिर युद्ध में पराजित हो गए।वे अपने आप को शर्मशार महसूस कर रहे थे। अर्जुन एवं भगवान् कृष्ण युधिस्ठिर से मिलने आये। युधिस्ठर को लगा कि अर्जुन कारण से बदला लेकर उनसे आशीर्वाद लेने आये है। लेकिन हकीकत जानकार वे अर्जुन पर क्रोधित हो गए और उन्होंने अपना शस्त्र किसी और को दे देने का आदेश दे दिया। इस पर क्रोधित होकर अर्जुन ने युधिस्ठर पर तलवार उठा ली क्योंकि यह अर्जुन की प्रतिज्ञा थी कोई भी उनसे अपना शस्त्र देने को कहेगा तो वह उसकी ह्त्या कर देंगे। तब कृष्ण ने अपमानित मनुष्य को मरे होने के सामान समझकर युधिस्ठिर का अपमान कर अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने को कहा। पहली बार अपने गुरु सामान बड़े भाई को अपमानित कर अर्जुन ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी की।

अनमोल वचन -यह सत्य है कि अगर जिंदगी इतनी अच्छी होती तो हम इस दुनिया में रट -रट हुए ना आते /मगर एक मीठा सत्य यह भी है कि अगर यह जिंदगी इतनी बुरी होती तो जाते -जाते लोगों को रुलाकर ना जाते /फितरत ,सोच और हालात में फर्क है वरना इंसान कैसा भी हो दिल का बुरा नहीं होता।

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