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कोडे-two new short motivational stories about a king and anmol vachan

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कोडे -एक राजा के पास कई नौकर थे ,उनमे से एक नौकर जो उनके शयन कक्ष की सफाई करता था उसने मुलायम पलंग पर लेट गया। उसने पहले इत्मीनान कर ली कि कोई देख तो नहीं रहा है। वह काम से थका हारा था सो उस मुलायम बिस्तर पर उसकी आँखें लग गयी। अभी उसके सोये पांच मिनट ही हुए थे कि बाहर तैनात प्रहरी ने उसे राजा के -पलंग पर सोये देख लिया। वह नौकर को पकड़कर राजा के दरबार में लाया और इस हिमाकत के बारे में बताई। राजा कुपित होकर उसे भरी सभा में पचास कोड़े लगाने का हुक्म दिया। कोड़े लगने शुरू हो गए १० -१२ कोड़े लग चुके थे लेकिन वह हँसता ही जा रहा था। राजा ने कहा ,-ठहरो , और पूछा ,-तुम्हे दर्द नहीं हो रहा तुम हंस क्यों रहे हो ?’ नौकर ने कहा ,हजूर ,दर्द तो बहुत हो रहा है पर मैं यह सोच कर हंस रहा हूँ कि मैं थोड़ी देर के लिए आपके बिस्तर पर सो क्या गया , मुझे पचास कोड़े खाने पड़ रहे हैं हुजूर तो इस बिस्तर पर रोज़ सोते हैं तो आपको उपरवाले के दरबार में कितने कोड़े लगाए जाएंगे ?राजा को अपनी गलतिका एहसास हुआ और नौकर को सज़ा से मुक्त करने का आदेश दे दिया।
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[२]अनमोल वचन -एक गाँव में सप्ताह के एक दिन प्रवचन का आयोजन होता था। ग्रामीणों द्वारा यह व्यवस्था कराइ गई थी ताकि लोगों को कुछः ज्ञान हो सके। एक बार एक ज्ञानी महात्मा को बुलाया गया।
ग्रामीण समय पर प्रवचन सुनने के लिए समय पर पहुँच गए। उस ज्ञानी महात्मा ने पूछा -‘क्या आपको मालूम है कि मैं क्या कहने जा रहा हूँ ?’ ग्रामीणों ने कहा ,-‘नहीं तो ‘ उन्होंने गुस्से भरे लहजे में कहा ,-‘जब आपको पता ही नहीं है कि मैं क्या कहने जा रहा हूँ तो फिर आपसे क्या कहूं ?’वे नाराज़ होकर चले गए। गाँव के सरपंच ने उनसे यह कहते हुए माफ़ी मांगी कि लोग अनपढ़ हैं इसलिए उनलोगों ने ऐसी बातें कही। ‘ज्ञानी मान गए। अगले दिन उन्होंने फिर वही सवाल किया ,-क्या आपको पता है कि मैं क्या कहने जा रहा हूँ ?’ इस बार लोग सतर्क थे उन्होंने कहा ,-हाँ ,हमें पता है कि आप क्या कहेंगे वे फिर भड़क गए। इसका अर्थ है कि आप सब मुझसे ज्यादे ज्ञानी हैं तभी तो आपको पता है कि मैं क्याकहने जा रहा हूँ। गाँव वाले दुविधा में पड़ गए कि अब क्या कहें। तीसरी बार फिर वही सव्वल उन्होंने किया तो लोग उठकर जाने लगे। ज्ञानी ने कहा ,-‘अरे मैं आप लोगों को कुछ कहने आया हूँ और आप लोग जा रहे हैं ? लोगों ने हाथ जोड़करकहा ,-‘ आप तो परम ज्ञानी हैं हम लोग तो मुर्ख और अज्ञानी हैं हमें आपकी बातें समझ में नहीं आती। कृपया अपना अनमोल वचन हम पर व्यर्थ ना करें ज्ञानी
महात्मा अकेले रह गए उनका दर्प चूर -चूर हो गया था।

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