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मुखोटे-Two new very short hindi inspirational stories

Two new very short hindi inspirational stories

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दशहरा का मेला लगा था। मेले में एक दूकान भिन्न -भिन्न मुखोटों से सज़ा था। खासकर राम और रावण की मुखौटों की। एक बच्चा अपने पापा से मुखौटा खरीद देने की जिद की। पिता ने दुकानदार से पूछा -भैया ,कैसे दिए ये मुखौटे ? कौन सा चाहिए साहब -राम का या रावण का ?दुकानदार ने पूछा। बेटा कौन सा लोगे इन दोनों मुखौटों में से ? .’पापा ,वो डरावना वाला ,इससे मैं अपने दोस्तों को डरावूंगा। मम्मी ने बेटे को समझाया -बेटा ,राम जी वाला मुखौटा ले लो। देखो ना कितना सुन्दर है। नहीं ,हम तो डरावना वाला ही लेंगे ,बेटे ने जिद ठान दी। पापा ने कहा ,-अच्छा दोनों ही ले लेते हैं। .भैया ,दोनों के कितने -कितने दाम हैं ?’एक ही दाम है ,दस -दस रुपया। .दोनों का एक ही दाम? मम्मी ने आश्चर्य से पूछा। ‘भला इसमें आश्चर्य की क्या बात है ?जवाब व्यावहरिकता पूर्ण था
और भी प्रेरक कहना पढ़ना ना भूलें==>
महाकवि कालिदास
आत्मनिर्भर
दुःख क्या है इसे कौन तय करता है?

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[२] -हिसाब -आधुनिक जगत में रिश्ते भी बिकाऊ हो गए हैं। अर्थ -प्रधान समाज में ज़रा -ज़रा सी बात पर टूटना -बिखरना आम बात हो गई है। ‘,माँ ,आपने दो महीने पूर्व मुझसे दो सौ सत्तर रुपये लिए थे बेटे ने अपनी माँ को जो अलग रहती थी ,याद दिलाया। हाँ बेटा ,मुझे याद है ,कहते हुए माँ ने तीन सौ रुपये यानी सौ -सौ के तीन नोट अपने बेटे को दिया। ,’पर मान ,मेरे पास तो चेंज नहीं है ‘ कोई बात नहीं है बेटा। तू ही रख ले ,यह कहकर माँ बेटे के पसंद का जलपान बनाने रसोई घर चली गई। कुछ दिनों बाद बेटा माँ से मिलने आया। एक ठेलावाला सेब बेच रहा था। उसने अपनी माँ से रुपये लेकर सेब अपने परिवार के लिए खरीद लिया। कुछः दिनों बाद वह जब अपनी माँ से मिला तो पैसे लौटाने लगा। ममता तो बिकाऊ नहीं होता। माँ के आँखों से अश्रु धार बह निकले। माँ रख लो ,ये तो हिसाब की बात है इनमे आपके तीस रुपये पहले के भी हैं। माँ से रहा नहीं गया ,-तू मुझसे हिसाब कर रहा है ? अरे ,तूं किस -किस बात का हिसाब करेगा ?क्या चुका सकेगा वह क़र्ज़ जो मेरा तुझ पर है ?हम अलग जरूर रह रहे हैं पर दिल के रिश्ते तो अलग नहीं हुए। मेरा प्यार तो अभी भी वही है तू मेरे लिए तो अब भी वही प्यारा सा बच्चा है ,अपना प्यारा बेटा। हमारे रिश्ते के बीच ये हिसाब -किताब कहाँ से आ गया ?क्या तू अपने बेटे से भी हिसाब की बात सोच सकता है ?सच ही तो है -‘जिस माँ की ममता पाने से। अपमान ममत्व का होता हो /उस ममता की प्यास से /प्यासा मर जाना बेहतर है ,पग -पग पर साथ निभाती जो /निराश कभी नहीं होने देती जो /उस ममता के आँचल में ईश्वर का ना होना बेहतर है। /जब तूफ़ान जिद पर अड़ जाये /नाव डुबाने की खातिर /लहरें फन फैला ले नागिन सा /जहर उगलने के लिए /ऐसे में भीख ना मांगो तुम /चाहे किनारे हो दूर सही ,/पागल तूफ़ा से ना फ़रियाद करो /माँ को आवाज़ लगाना बेहतर है।

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