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दो अजब गजब कहानियां-Two strange and unique motivational story in hindi language

Two strange and unique motivational story in hindi language

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[१] आखिरी बातचीत -लू शुन – पिताजी बड़ी मुश्किल से सांस ले पा रहे थे। सीने की धड़कन भी सुनाई नहीं दे रही थी। कोई मदद नहीं कर सकता था। सोच रहा था कि वे शांतिपूर्वक परलोक सिधार जाएँ। मरते हुए पिता की शांत मृत्यु की कामना कोई गलत बात तो नहीं थी। हमने उनकी आत्मा की शान्ति के लिए श्रीमती येन के कहने पर की और राख को एक कागज़ में लपेटकर पुड़िया उनके हाथ में पकड़ा दी। उनसे कुछ बात करो येन ने कहा। उनका आखिरी वक़्त आ चुका है। बाबूजी ,बाबूजी मैंने उन्हें पुकारा। जोर लगाकर दुबारा बोला। बाबूजी के चेहरे पर जो थोड़ी सी शान्ति दिखाई दे रही थी ,वह भी गायब हो गई। बाबूजी मैंने बड़ी ही कातरता से कहा। क्या बात है ? क्यों चिल्ला रहे हो ? यह उनकी मद्धिम आवाज़ थी। बाबूजी इस बार मैं तबतक बुलाता रहा जब तक उन्होंने आखिरी सांस नहीं ले ली। अपनी वह कातर और मार्मिक आवाज़ मैं आज भी वैसे ही सुन सकता हूँ और जब भी मैं अपनी वे चीखें सुनता हूँ ,मुझे लगता है कि वह मेरे जीवन की सबसे बड़ी गलती थी।
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[२] बेशकीमती नगीने -पाव्लो कोयलो – किसी शहर में एक रब्बाई [यहूदी पुजारी ] अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहता था। एक बार जब वह किसी काम से घर से दूर था तभी एक त्रासद दुर्घटना में उसके दोनों पुत्र मारे गए। वह बहुत हिम्मती और ईश्वर में अटूट आस्था रखनेवाली औरत थी। उसने अपने आपको बड़ी मुश्किल से सम्भाला। उसे चिंता थी कि पति के लौटने पर यह दुखद समाचार कैसे सुनाएगी ? शायद उसका पति यह सदमा झेल ना पाए। अगली सुबह रब्बाई घर पहुंचा। उसने अपने लड़कों के बारे में पूछा। पत्नी ने कहा -उनकी फ़िक्र मत कीजिए ,नहा -धोकर आराम कीजिए। कुछ समय बाद भोजन पर बैठे पति ने फिर बच्चों के बारे में पूछा। पत्नी ने असहज होकर अपनी एक उलझन के उपाय के बारे में पूछा। पत्नी ने कहा -आप जब बाहर थे तब हमारे एक मित्र ने मुझे दो बेशकीमती नगीने सहेजकर रखने को दिए बहुत ही कीमती और नायाब नगीने। मैंने आज तक ऐसी अनूठी चीज नहीं देखी वह इसे लेने आनेवाला है और मैं उन्हें लौटाना नहीं चाहती आप क्या कहेंगे ? रब्बाई ने कहा -यह कैसी बातें तुम कर रही हो ? जो हमारा है ही नहीं उसे खोने का दुःख कैसा ? उसे अपने पास रखना चुराना ही कहलायेगा ना ? ठीक है हम उनकी सम्पदा लौटा देंगे। पत्नी ने कहा। हमारे बच्चे ही वे बेशकीमती नगीने हैं। ईश्वर ने उन्हें सहेजने के लिए हमारे सुपुर्द किया था। और आपकी गैरहाजरी में उसने उन्हें हमसे वापस ले लिया . वे जा चुके हैं। रबाई ने अपनी पत्नी को भींच लिया और दोनों अपनी -अपनी आंसुओं की धारा में बहते रहे ,. रब्बाई को अपनी पत्नी की कहानी का मर्म का बोध हो गया था। उस दिन के बाद से वे साथ -साथ उस दुःख से उबरने का प्रयास करने लगे।

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