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दो अजब गजब कहानियां-Two strange and unique stories in hindi language

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[1] उत्तराधिकारी -एक राजा जब बूढ़े हो गए तब उन्होंने अपने तीनो पुत्रों में से एक पुत्र को उत्तराधिकारी चुनने हेतु परीक्षा लेने का विचार किया। तीनो पुत्रों को एक -एक मुद्रा दी और कहा कि इससे अपने कमरे को पूरा भरना है पहले पुत्र ने उस धन से अपना कमरा कचरे से भर दिया। दूसरे पुत्र ने उस धन से अपना कमरा घास -फूंस से भर दिया। तीसरे पुत्र ने एक दीपक उस कमरे में जलाया और उसका कमरा प्रकाश से भर गया। एक अगरबत्ती जलाई तो पूरा कमरा सुंगंध से भर गया। कमरे में वाद्य यंत्र बजे तो कमरा संगीत के स्वरों से गूंज उठा। राजा ने तीसरे पुत्र को उत्तराधिकारी चुना जिसने अपने कमरे को ,प्रकाश ,सुगंध और संगीत के स्वरों से भर दिया था।
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[२]सज्जन की खोज -एक बादशाह था उसे एक समझदार नौकर की जरूरत थी मंत्री ने तीन उम्मीदवार उनके सामने पेश किये बादशाह ने पूछा – यदि मेरी और तुम्हारी दाढ़ी में साथ -साथ आग लगे तो पहले किसकी आग बुझाओगे ? पहले ने कहा -हुजूर ,पहले आपकी बुझाऊंगा। दूसरे ने कहा -पहले मैं अपनी बुझाऊंगा .तीसरे ने कहा -एक हाथ से अपनी और दूसरे हाथ से अपनी तथा दूसरी हाथ से आपकी बुझाऊंगा। बादशाह ने तीसरे की नियुक्ति कर ली। उन्होंने दरबारियों से कहा ,जो अपनी उपेक्षा करके दूसरों का भला करता है ,वह अव्यवहारिक है जो स्वार्थ को सर्वोपरि समझता है ,वह नीच है। और जो अपनी और दूसरों की भलाई का समान रूप से ख्याल रखता है वही सज्जन है। क्या खूब लिखा है किसी ने -संगत का ज़रा ध्यान रखना साहब ,संगत आपकी खराब होगी और बदनाम माँ -बाप और संस्कार होंगे। –ज्यादा कुछ नहीं बदलता उम्र के साथ /बस –बचपन की जिद समझौतों में बदल जाती है। अपेक्षाएं जहां ख़त्म होती हैं ,सुकून वहीँ से शुरू होता है। हजारों कल और लाखों आनेवाला कल के बीच एक ही आज होता है इसलिए इसे बेकार नहीं जाने दे। / मतलब की बात सब समझ लेते हैं ,लेकिन बात का मतलब बहुत काम ही लोग समझ पाते हैं। आवाज़ ऊँची होगी तो कुछ लोग सुनेगे ,किन्तु बात ऊँची होगी तो बहुत लोग सुनेंगे

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