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दो अनूठी कहानियां-two strange hindi stories for young audiance

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[1} पत्थर : गाडी के पहिये से एक पत्थर अलग हो गया सड़क से उसने सोचा -दूसरे पत्थरों के साथ क्यों बंधा रहूं आखिर मैं भी तो स्वतंत्र रह सकता हूँ। इतने में एक लड़का आया ,उसने इस पत्थर को जमीन से उठा लिया पत्थर ने सोचा -मैं चल रहा हूँ क्योंकि मैं चलना चाहता था मुझमे असीम इच्छाशक्ति है। लड़के ने उस पत्थर को एक घर की तरफ फेंका पत्थर ने सोचा -मैं उड़ाना चाहता था इसलिए उड़ रहा हूँ यह कोई मुश्किल काम तो नहीं है। पत्थर घर की शीशा से जा टकराया। शीशा चिल्लाया -मुर्ख तुमने यह क्या किया मैं तो टूट गया हूँ। पत्थर ने दम्भपूर्वक कहा – बेहतर होता कि तुम मेरी राह में नहीं आते। सब कुछ मेरी इच्छा से होनी चाहिए। घर का नौकर आया। उसने पत्थर को उठाकर खिड़की से बाहर फेंक दिया। पत्थर फिर से सड़क पर आ गया। वहाँ उसने पत्थरों से कहना शुरू किया -दोस्तों ,मैंतो महल के निमंत्रण पर गया था लेकिन मुझे वहाँ की रईसी पसंद नहीं आई। मेरा मन तो आप लोगों के लिए तड़प रहा था। सो वहाँ की परवाह नहीं कर आप सभी के बीच लौट आया हूँ।
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[२] चूहा पकड़ने की किताब -एक किताब में चूहा पकड़ने के उपाय बताये गए थे। किताब के मालिक ने एक दिन उसे रसोई घर में छोड़ दिया। लम्बे दाँतोंवाले चूहों ने किताब पर आक्रमण कर दिया। किताब अपनी दुर्दशा देख चिल्लाई ,मुर्ख चूहों जानते हो मैं कौन हूँ ? एक किताब ,और क्या ? किताब ने गर्वित अंदाज़ में कहा -मुझमे चूहों को पकड़ने की कौशल बताया गया है। तुम सब नाहक अपनी मौत को छेड़ रहे हो। किताब की इन बातों पर चूहों ने कोई ध्यान नहीं दिया और उसे कुतरते रहे। थोड़ी देर में किताब कागजी टुकड़ों की ढेर बन गई। किताब में कुछ भी लिखों इससे कुछ नहीं होता अगर उनकी बातों पर अमल ना किया जाय। अपने -अपने अंदाज़ -मिर्ज़ा ग़ालिब – उड़ने दे इन परिंदो को आज़ाद फ़िज़ां में ग़ालिब जो तेरे अपने होंगे ,वो लौट जाएंगे। शायर इकबाल का उत्तर -ना रख उम्मीद -ए -वफ़ा किसी परिंदे से जब पर निकल आते हैं तो अपने भी आशियाना भूल जाते हैं क्या कमाल का हौसला है -शादी शुदा मर्दों का -जब बीबी कहती है-भाड़ में जाओ तो ऑफिस चला जाता है /और जब बॉस कहता है -जहन्नुम में जाओ तब घर चला आता है।

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