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दो अनूठी कथायें-two unique and motivational stories in hindi

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स्कूल में सभी उसे मंद बुद्धि कहकर बुलाते थे। वह पढ़ने में बहुत कमजोर था इसलिए गुरुजन भी उससे नाराज़ रहते थे। उसकी बुद्धि का स्तर औसत से भी काम था। कक्षा में उसका प्रदर्शन हमेशा खराब रहता था। इसलिए उसके सहपाठी हमेशा उसका मज़ाक उड़ाते थे। जब भी वह क्लास में आता ,बच्चे उसपर हंसने लगते कोई उसे महामूर्ख तो कोई उसे बैलों का राजा कहता यहां तक कि अध्यापक भी उसका मज़ाक उड़ाने से नहीं चूकते। इससे परेशान होकर उसने स्कूल जाना ही छोड़ दिया। अब वह निरर्थक इधर -उधर भटकता और अपना कीमती समय बर्बाद करता। एक दिन वह कहीं जा रहा था। उसे जोरों की प्यास लगी। वह इधर -उधर पानी खोजने लगा। उसे एक कुवाँ दिखाई दिया। कुवे से पानी खींचकर उसने अपनी प्यास बुझाई। वह थक चुका था इसलिए वह वहीँ बैठ गया। उसकी नज़र पत्थर पर गई जिसपर रस्सी के निशाँ थे। वह मन ही मन सोचने लगा बार -बार रस्सी से पानी खींचने पर पत्थर पर भी निशाँ पड़ जाते हैं तो उसे भी लगातार मिहनत करने पर विद्या आ सकती है। उसने फिर से विद्यालय जाना शुरू कर दिया। उसके लगन और मिहनत को देखकर अध्यापक भी उसका सहयोग करने लगे। उसके मिहनत और लगन ने रंग लाया और कुछ ही सालों बाद यही विद्यार्थी प्रकांड विद्वान् वरदराज़ के रूप में विख्यात हुआ। जिसने संस्कृत में मुग्धबोध और लघु सिद्धांत कौमुदी जैसे ग्रंथों की रचना की।
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[२] चिंता नहीं चिंतन कीजिये। – बात पुरानी है गुजरात के एक शहर में एक वकील साहब अपनी पत्नी के साथ रहते थे। वह अपनी पत्नी को बेहद प्यार करते थे। एक बार उनकी पत्नी बेहद बीमार पड़ गई। एक बड़ा ऑपरेशन होना था। उसी दिन दूसरे शहर में एक बड़े कोर्ट में केस की सुनवाई थी। वकील साहब ने अपने एक वकील मित्र को उस केस में बहस हेतु जाने को कहा। पत्नी सुन रही थी उसने कहा -यह आप क्या कह रहे हैं ? यदि आप नहीं गए तो एक वेगुनाह को सज़ा हो जायेगी। मैं अपने आप को माफ़ नहीं कर पाउंगी। आप जाइये और बहस कीजिये डॉक्टर साहब ऑपरेशन कर देंगे। दुखी मन से वकील साहब दूसरे शहर को चल दिए। वहस के दौरान ही कोर्ट के दरबान ने एक कागज़ का टुकड़ा वकील साहब को दिया। उन्होंने वहस जारी रखा। वकील साहब केस जीत गए थे सभी ने बधाईआं दी। किसी ने पूछा -वकील साहब ,वह कागज़ के टुकड़े में क्या लिखा था ? वकील साहब ने कहा -वह टेलीग्राम था। अभी कुछ समय पहले मेरी पत्नी की मृत्यु हो चुकी है। ये बात सुनकर सभी की आँखे नम हो गई। वह वकील कोई और नहीं देश के पहले उप प्रधान मंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल थे
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