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मगरमच्छ के पेट से निकली थी ज़िदा रानी-weird news india

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मगरमच्छ के पेट से निकली थी ज़िदा रानी……..
सुन कर हैरानी हुई ना, भला कोई भी मगरमच्छ के पेट से ज़िदा कैसे निकल सकता है. मगरमच्छ के पेट में जाने के मतलब है,मौत को गले लगा लेना.फिर भला रानी मगरमच्छ के पेट से जिन्दा कैसे निकल गयी ? तो आपको बता दे की, उत्तर प्रदेश के वारणशी के महमूरगंज इलाके में मोती झील हवेली के दरवाजे पर एक मगरमच्छ टंगा हुआ है, जो सभी के लिए कोतुहल का विषय बना हुआ है.आपको बता दे की, मोतीझील हवेली 1908 में बाबू मोतिचंद्र ने बनाया था.90 वर्ष से 20 फीट लंबी और 2 फीट चौकोर मगरमच्छ टंगा हुआ है,जिसमे पुआल भरा हुआ है.जब इस टंगे हुए मगरमछ का सच जाने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने राजा के बेटे अशोक कुमार गुप्ता से पूछ-ताछ की तो उन्होंने बताया की, रानी की रक्षा के लिए राजा ने इस मगरमछ को मारा और मार उसे टांग दिया.कहानी का क्या सच है क्या झूठ, ये तो पता नहीं चल पाता है ,लेकिन अगर झूठ देखा जाए तो, ऐसा कहा जाता है कि कभी-कभी इस विशाल मगरमच्छ ने महल के पीछे स्थित झील में रानी को निगल लिया था. राजा ने मगरमच्छ को मार डाला और उसके पेट से रानी को जिन्दा बाहर निकाला,और राजा ने मगरमच्छ को यहाँ टांग दिया था. लेकिन झील जब सिर्फ राजा और उनके परिवार के लिए था, तो उसमे मगरमच्छ कहाँ से आ गया?
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यह सोचने वाली बात है.अगर सच देखा जाए तो,अशोक कुमार ने कहा, “यह 1920 के दशक का मामला है. बाढ़ में विशाल मगरमच्छ बहता हुआ आज़मगढ़ के अजमतगढ़ के मूल ग्रामीणों को दिखा, जिससे वहां के लोग डर गए, क्योंकि मगरमच्छ गांव में प्रवेश कर गया था, जिसकी वजह से खतरा उत्पन हो गया था, इसलिए पूरे गांव के लोगों ने मिलकर इसे मार दिया. संघर्ष के बाद कई घंटे बाद मगरमच्छ मारा गया. हत्या के बाद, उन लोगों ने सोचा कि अब क्या करना है, फिर उन्होंने प्रमुख की राय लेने का फैसला किया और फैसला किया कि यह बनारस का राजा मोतीचंद को गांव की और से उपहार के तौर पर दिया जाना चाहिए. “उसके बाद, वे गांव से मगरमच्छ को बैलगाड़ी पर लादकर ले आए. ब्रिटिश अधिकारी और जनता इतनी बड़ी मगरमच्छ देखने कर आश्चर्यचकित थे, इसे वहां से यहाँ लाने में लगभग दो दिन लगे. ”
आज भी यह मगरमच्छ महल के गेट पर टंगा हुआ नजर आ जायेगा,हलाकि अब इसका सर नहीं है,वजन ज्यादा होने की वजह से सर टूट कर गिर गया,और उसके बदले पुवाल भरा नजर आ जायेगा.

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