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श्रेष्ठ कौन-who is best a new short motivational story of vikarm and betal

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यह कहानी गांधार राज्य की है जहां क़ानून तोड़नेवालों को कड़ी सज़ा दी जाती थी। कानूनन कोई भी व्यक्ति किसी व्याहता स्त्री के साथ किसी प्रकार का सम्बन्ध नहीं रख सकता था। गुरुदत्त नाम का एक व्यापारी अपने लिए पत्नी की खोज कर रहा था। उसने मंदिर में सुन्दर स्त्री को देखा उससे प्रेम करने लगा। युवती का नाम चन्द्रसेना था उसका विवाह तय हो चुका था। उसके पति नाम जयकंठ था। यह सब जानकर गुरुदत्त का दिल बैठ गया। गुरुदत्त को चन्द्रसेना का कुछ दिनों बाद एक पत्र मिला जिस मे लिखा था कि वह उससे मिलने जरूर आयेगी। उसका विवाह जयकंठ से हो गया। उसकी पत्नी ने गुरुदत्त के बारे अपने पति को बताया। उसने मिलने अनुमति दे दी। वह गुरुदत्त से मिलने चल दी। चारों तरफ घना अन्धेरा था तथा सड़कें सुनसान। थी तभी एक चोर सामने आया वह उसके सारे गहने लेना चाहता था /पहले तो वह घबराई फिर हिम्मत जुटाकर बोली – मै लौटते समय तुम्हे सारे गहने दे दूंगी। चोर ने विश्वास कर उसे जाने दिया। जब वह अपने प्रेमी गुरुदत्त के पहुंची तब उसने कहा कि विवाह की रात उसे यहां नहीं आना चाहिए था। उसे अपने पति के पास रहना चाहिए था। चन्द्रसेना ने बताया कि वह अपने पति से अनुमति मिलने के बाद ही उससे मिलने आयी है। गुरुदत्त ने कहा की कानून के मुताबिक़ वह किसी परायी स्त्री से नहीं मिल सकता लिहाजा वह लौट जाए। चन्द्रसेना लौट गयी। लौटती में वही चोर मिला। चोर ने उसके उदास चेहरे को देखकर कारण जानना चाहा। उसने उसे अपनी सुभकामना दी वह बोला मैं चोर होने से पहले एक इंसान हूँ। तुम पर मुसीबतों का पहाड़ गिरा है फिर मैं कैसे तुम्हारी गहने ले लूँ ?यह कहकर वह वहाँ से चला गया। चन्द्रसेना ने घर लौटकर अपनी पति को सारी बातें बताई। उसका पति भीतर ही भीतर उससे नाराज़ था। उसने कहा कि राजा ,मंत्री ,पत्नी ,व्यक्तिके बाल ,और नाखून अपने स्थान पर ही शोभा देते। हैं किसी विवाहित स्त्री की शोभा इसी में है की वह अपने पति के लिए वफादार रहे। वैताल ने कहानी समाप्त की और विक्रम से पूछा – चोर ,जयकांत और गुरुदत्त में श्रेष्ठ कौन है ? उत्तर नहीं मिलने तुम्हारे सिर टुकड़े -टुकड़े हो जायेंगे। विकर्म ने कहा -‘तीनो में चोर ही सर्वश्रेष्ठ है। चन्द्रसेना ने अपने पति को गुरुदत्त के बारे में बताया तो उसने उससे प्रेम करना छोड़ दिया। प्रेमी ने राजा के हुकुम के डर से अपना सम्बन्ध तोड़ लिया। लेकिन चोर ने सारी कहानी सुनकर उसे कोई हानि नहीं पहुंचाया। वह चाहता तो आसानी से सारे गहने ले सकता था। उसने चोरी का स्वभाव त्याग कर अपनी श्रेश्ठता परिचय दिया। इसलिए निःसंदेह इन तीनो में चोर ही श्रेष्ठ है। वैताल ने कहा -राजन तुमने सही उत्तर दिया यह कहकर वैताल पेड़ की तरफ भागने लगा और विक्रम उसके पीछे भागे।
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