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पापी कौन-Who is sinful a new inspirational story in hindi of the king of kaashi

Who is sinful a new inspirational story in hindi of the king of kaashi
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प्राचीन समय में काशी के राजा को एक बेटा था जिसका नाम बज्र मुकुट था। एक दिन उनका लड़का दीवान के लड़के के साथ शिकार खेलने गया। काफी दूर जाने के बाद उन्हें एक तालाब मिला। जिसमे असंख्य कमल के फूल खिले थे। दोनों मित्र ने तालाब के पानी से हाथ -मुंह धोया और मंदिर गए। बाहर आने पर देखा राजकुमारी अपने सहेलियों के साथ स्नान करने आई है। राजकुमार उसे देखते ही मोहित हो गया। राजकुमारी भी उसे देखती रही फिर अपने जुड़े से कमल के फूल को निकला और दांत से कुतरा पैरों के नीचे दबाया फिर छाती से लगाकर और अपने सखियों के साथ वापिस चली गई। राजकुमार ने अपने मित्र से कहा कि मैं राजकुमारी के वगैर नहीं रह सकता पर उसका कोई आता -पता तो मुझे मालूम नहीं। दीवान के लड़के ने कहा -आप घबराएं नहीं ,वह तो सब कुछ बता गई है। उसने कमल का फूल सर से उतारकर कानो से लगाया यानी वह कर्णाटक की रहनेवाली है। दांत से कुतरा यानि वह दंतबाट राजा की बेटी है। पाऊँ से दबाने का अर्थ है कि उसका नाम पद्मावती है और छाती से लगाने का अर्थ है कि तुम मेरे दिल में बस गए हो। दोनों कर्नाटक देश की तरफ चल पड़े। महल के पास पहुंचे तो दरबार पर एक बुढ़िया चरखा चला रही थी। उन दोनों ने पास जाकर कहा कि वे लोग सौदागर हैं और रहने के लिए थोड़ी सी जगह चाहिए। दोनों वहीँ ठहर गए। बुढ़िया ने पूछने पर बताया कि उसका एक बेटा है जो राजा की चाकरी में है। वह पद्मावती की धाय थी दिन में एक बार उससे मिल आती है। उसने बुढ़िया को कुछ धन दिया और राजकुमार के आने की सूचना देने को कहा। बुढ़िया ने जैसे ही संदेशा सुनाया राजकुमारी ने हाथो में चन्दन लगाकर बुढ़िया के गाल पर एक तमाचा मारा और वहाँ से निकाल दिया। इसका मतलब अभी दस रोज चांदिनी के हैं उसके बाद अँधेरी रात में मिलेगी दीवान के लड़के ने समझाया। दस दिन के बाद बुढ़िया फिर गयी। इस बार राजकुमारी ने केसर के रंग में तीन उंगलियां डुबोकर मुंह पर मारी और कहा ,-‘भाग यहां से ‘ लड़के ने समझाया -उसने कहा है कि उसे मासिक धर्म हो रहा है तीन दिन ठहरो। तीन दिन बाद बुढ़िया फिर पहुंची। इस बार उसे फटकारकर पष्चिम की खिड़की बाहर निकल दिया। दीवान के लड़के ने बताया -मित्र ,उसने आज की रात तुम्हे उस खिड़की के राह बुलाया है। राजकुमार दो पहर बीत जाने के बाद वहाँ पहुंचा। राजकुमारी उसे महल के अंदर ले गई। दिन होते ही राजकुमारी ने राजकुमार को छिपा दिया और रात होते ही वह बाहर आ जाता। कई दिन बीत गए एक दिन वह अपने मित्र से बढियाँ भोजन के साथ मिलने पहुंचा। दीवान के लड़के ने कहा ,-मित्र यह तुमने अच्छा नहीं किया , राजकुमारी समझ गई है कि जबतक मैं यहां हूँ तब तक वह तुम्हे अपने वश में नहीं कर सकती इसलिए उसने इस खाने में जहर मिलाकर भेजा है। उसने एक लड्डू कुत्ते के आगे कर दिया। कुत्ता मर गया। राजकुमार ने कहा -ेऐसी स्त्री से भगवान् ही बचाये मैं अब उसके पास नहीं जाऊंगा। दीवान के लड़के ने कहा ,आज की रात जब वह सो जाये तब उसके जांघ पर त्रिशूल बनाकर उसके गहने लेकर आ जाना।
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राजकुमार ने ऐसा ही किया। दीवान का बेटा योगी का भेष बनाकर मरघट में बैठ गया और राजकुमार को गहने बेचने बाज़ार भेज दिया। कहा -पकडे जाओ तो कहना कि ये गहने मेरे गुरूजी के हैं। राजकुमार और गुरूजी यानी दीवान के लड़के पकडे गए ,राजा ने पूछा – महाराज ये गहने आपको कहाँ से मिले ? योगी बने दीवान के बेटे ने कहा – महाराज मेरे सामने डाकिनी मन्त्र सिद्ध करते समय डाकिनी आयी मैंने उसके गहने उतार लिए और उसकी जाँघों पर त्रिशूल के निशान बना दिए। महाराज ने रानी से पद्मावती के जाँघों पर निशान देखने को कहा। बात सत्य निकली ,दुखी राजा ने पूछा -‘महाराज ,धर्म शाश्त्र में खोटी स्त्रियों के लिए क्या दंड है ? देश निकाला -योगी बने दीवान के लड़के ने कहा। पद्मावती को जंगल ले जाकर छोड़ दिया गया। राजकुमार और दीवान का लड़का तो पहले से ही इसी ताक में थे वे राजकुमारी को लेकर वापस अपने राज्य में आ गए। और रहने लगे। बैताल ने विक्रमादित्य से पूछा -राजन यह बताओ कि पाप किसे लगा है ? राजा ने कहा – पाप तो राजा को लगेगा क्योंकि उन्होंने बिना कारण जाने राजकुमारी को देश निकाला दे दिया। बांकी सभी ने तो कर्तव्य का पालन किया। इतना कहना था कि बैताल फिर उसी पेड़ पर लटक गया।

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