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जीत-Win a new Hindi inspirational story of Mahatma Buddha and a saint

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कुरुदेश में मांगदीय नाम का अग्निपूजक ब्राह्मण रहता था। मांगदिया उसकी कन्या का नाम था जो अत्यंत रूपवती थी। उन्होंने अपनी कन्या के विवाह हेतु योग्य वर की खोज की पर योग्य वर नहीं मिला। उन्हें कोई वर पसंद ही नहीं आ रहा था। एक दिन की बात है भगवान् बुद्ध प्रातःकाल अपना पात्र और चीवर लेकर ब्राह्मण के अग्नि स्थान के पास खड़े हुए। बुद्ध को देखकर ब्राह्मण ने सोचा -इनके समान किसी अन्य पुरुष का मिलना दुर्लभ है सो क्यों नहीं इनकी शादी अपनी कन्या से करा दूँ ? ब्राह्मण ने बुद्ध से निवेदन किया -हे श्रमण मैंने अपनी कन्या के लिए योग्य वर की बहुत तलाश की पर नहीं मिला , बड़े भाग्य से आप मिले है वह आपकी चरणों की दासी बनने योग्य है। इतना कहकर वे अपनी बेटी को लाने घर की तरफ चल पड़े और अपनी पत्नी को कहा कि योग्य वर मिल गया है वस्त्र ,भूषण से सज्जित कर जल्दी चलो। बुद्ध उस स्थान को छोड़कर अन्यत्र गमन कर चुके थे। उन्हें नहीं पाकर बुद्ध को उनके पद चिन्ह मिले। ब्राह्मणी लक्षण शास्त्र की पंडित और तीनो वेदों में पारंगत थी। उसने पद चिह देखकर अपने पति को बताया कि ये पद -चिन्ह किसी तपस्वी के है। ब्राह्मण को बहुत गुस्सा आया। तभी ब्राह्मण ने बुद्ध को दूर से देखा। वही है मांगदिया का वर उन्होंने कहा -हे भिक्षु मई अपनी कन्या आपको समर्पित करता हूँ। बुद्ध ने कहा -विषय -भोग की तरफ मेरी तनिक भी कामना नहीं है। यह शरीर तो मल -मूत्र का भण्डार है मै तो इसका स्पर्श भी नहीं करना चाहता। इस बात को सुनकर ब्राह्मण कन्या को बहुत बुरा लगा। उसने सोचा ,अगर इस भिक्षु को मेरी कोई आवश्यकता नहीं तो कोई बात नहीं पर यह मेरा अपमान क्यों करता है ? मै इससे बदला लिए बिना नहीं रहूंगी। समय बीतता गया मांग दिया राजा उदयन की रानी बानी वह उनकी पटरानी बनी। पांच सौ दासियाँ उसकी सेवा में रहती थी। एक दिन उसे पता चला कि श्रमण गौतम कौशाम्बी आ रहे है।
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उसने नगर वासियों को प्रलोभन देकर सीखा दिया कि जब बुद्ध नगर में प्रवेश करें तो उन्हें अपशब्द कहकर बाहर निकाल दे। अपशब्द सुनकर आनंद को बहुत बुरा लगा और उन्होंने बुद्ध से कहीं अन्यत्र चलकर रहने का निवेदन किया। उन्होंने कहा -आनंद ,यदि वहाँ भी लोगों ने अपशब्द कहे तो कहाँ जाओगे ? देखो मै संग्राम में हाथी के सामान निश्चल हूँ। चारों तरफ से भी तीर लगे तो हाथी डटकर खड़ा रहता है। अनेको दुष्ट लोगों के अपवाद को सहन करना मेरा कर्तब्य है। याद रखो आनंद ,वश में किये हुए खच्चर ,सिंधु देश के घोड़े ,तथा जंगली हाथी उत्तम समझे जाते है लेकिन इसमें सबसे उत्तम वह है जो अपने आप को वश में रखता है।

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